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पॉजिटिव स्टोरी3000 से शुरू किया बिजनेस, बनाई एक करोड़ की कंपनी:चीन से प्रोडक्ट इंपोर्ट कर इंडिया में ऑनलाइन बेचता हूं

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हमारे पास दो ऑप्शन थे। पहला यह कि हम इंडिया में ही मिलने वाले प्रोडक्ट की ट्रेडिंग करें यानी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी से कोई प्रोडक्ट खरीदकर रिटेल में सप्लाई करें। दूसरा यह कि दूसरे देशों से वैसे प्रोडक्ट्स को इंपोर्ट करें, जो इंडिया में बमुश्किल मिलता हो।

मजाक-मजाक में हम दोनों दोस्तों ने 3 हजार रुपए से ट्रेडिंग बिजनेस शुरू किया था। चीन से बाथ और किचन एक्सेसरीज आइटम्स को इंपोर्ट करना शुरू किया। आज तीन साल में ही हमारी कंपनी का सालाना टर्नओवर एक करोड़ से अधिक हो चुका है।’

गुजरात का वडोदरा शहर। दोपहर के दो बज रहे हैं। 26 साल के करण सिंह राठौर अपने स्टोर पर ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन के पैकेट में प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग कर रहे हैं। ये सारे प्रोडक्ट्स करण चीन से इंपोर्ट कर इंडिया मंगवाते हैं। करण की दोस्त ऊर्जा ऑनलाइन प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग कर रही हैं। यही पर मेरी दोनों से बातचीत हो रही है।

करण बताते हैं, ‘शुरुआत तो मैंने बटर पेपर से की थी। बर्गर या इस तरह की खाने वाली चीजों को रैप करने के लिए बटर पेपर का इस्तेमाल किया जाता है ताकि बटर, चीज वगैरह… हाथ में न लगे। आज हम 5 से ज्यादा तरह के प्रोडक्ट्स ऑनलाइन सेल करते हैं।

इसमें वाटर स्टॉपर, फोर फुट पैड, सिलिकॉन एयर फ्रायर लाइनर, डिस्पोजल एयर फ्रायर लाइनर, एग सेपरेटर और बीबीक्यू मैट जैसे प्रोडक्ट्स हैं। बटर पेपर के अलावा इस तरह के बाथ और किचन एक्सेसरीज आइटम्स की इंडिया में बमुश्किल ही मैन्युफैक्चरिंग हो पाती है। अगर कहीं मिलता भी है तो ज्यादा कॉस्ट पर।’

करण इस बिजनेस की शुरुआत को लेकर दिलचस्प किस्सा बताते हैं। वो कहते हैं, ‘2018 का साल था। हम दोनों कॉलेज असाइनमेंट पर वर्क कर रहे थे, इसी दौरान ट्रेडिंग बिजनेस में स्कोप दिखा। मैं पढ़ने में औसत से भी कम था। मुझे याद है पापा कहते थे कि तुम एग्जाम भी पास कर जाओ, तो बड़ी बात होगी।

जब बिजनेस के बारे में सोचा तो हम दोनों दोस्तों के पास न तो कोई फंड था और न ही कोई जानकारी। शुरुआत में प्रोडक्ट बनाने का कोई प्लांट भी नहीं लगा सकता था। जब घरवालों को बताया कि हम ट्रेडिंग करने का बिजनेस स्टार्ट कर रहे हैं, तो उनका कहना था- पढ़ाई-लिखाई तो ढंग से कर नहीं पाए, बिजनेस क्या करोगे। कोई अच्छी नौकरी ही ढूंढ लो।

हमें कुछ अपना करना था। इसलिए ट्रेडिंग मार्केट को और एक्सप्लोर करना शुरू किया। पता चला कि जो चीजें इंडिया में आसानी से नहीं मिल पाती हैं, उसे चीन से इंपोर्ट करके बेचा जा सकता है।

पापा का भी बिजनेस रहा है क्या?

मेरे इस सवाल पर करण सहम जाते हैं। कुछ देर ठहरने के बाद वो कहते हैं, ‘बिजनेस शुरू किए हुए तकरीबन दो साल हुए थे। मैं राजस्थान से बिलॉन्ग करता हूं। 2021 की बात है। उस वक्त कोरोना महामारी की दूसरी लहर आ चुकी थी। मैं अपनी फैमिली के साथ गांव में था। पूरे बिजनेस को ऊर्जा संभाल रही थी। तभी मम्मी-पापा, दोनों की मौत हो गई।

करण बताते हैं, 'सबसे पहले मम्मी की मौत हो गई। फिर सात दिन बाद पापा की। सब कुछ खत्म हो गया। लगा कि अब जीने से क्या फायदा….। जिनके लिए जी रहा था, अब वही नहीं रहे। करीब 6 महीने तक डिप्रेशन में रहा। क्या ही कह सकता हूं…।'

कहते-कहते करण चुप हो जाते हैं।

ऊर्जा कहती हैं, ‘हम दोनों के पापा एक ही कंपनी में काम करते थे। हम लोग रहते भी एक ही मोहल्ले में थे। करण ने BBA किया है, जबकि मैं B.Com की स्टूडेंट रही हूं। कॉलेज असाइनमेंट कंप्लीट करने के दौरान 2018 में ट्रेडिंग बिजनेस का आइडिया आया, लेकिन हमें कुछ भी पता नहीं था।

मुझे याद है, हम दोनों घरवालों से छिपकर मिलते थे और बिजनेस को लेकर डिस्कस करते थे, रिसर्च करते थे। ट्रेडिंग बिजनेस में रूल-रेगुलेशन के बारे में पूरी तरह से पता होने की जरूरत होती है। हमने इंटरनेट खंगालना शुरू किया।

इंटरनेशनल ट्रेडिंग मेथड, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट करने के लिए लाइसेंस, प्रोडक्ट को बेचने के लिए ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के बारे में जाना। तकरीबन 6 महीने तक हम दोनों इस पर रिसर्च करते रहे, तब जाकर बिजनेस की शुरुआत की।’

करण कहते हैं, ‘जब घर वाले चाहते ही नहीं थे कि हम लोग ऐसा कोई बिजनेस शुरू करें, तो उस समय उनसे पैसा मांगने का तो सवाल ही नहीं था। मांगता भी तो नहीं मिलता। मुझे याद है कि ऊर्जा के पास 3 हजार रुपए थे। इतने पैसे से तो ट्रेडिंग करना मुश्किल था।

2019 में फास्ट फूड मार्केट इंडिया में ज्यादा बूम कर रहा था। इसमें बटर पेपर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। बटर पेपर को मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से लेकर वडोदरा की दुकानों में जाकर बेचता था। खुद स्कूटी से जाता और सेल करता था।

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फिर जब धीरे-धीरे बिजनेस ग्रोथ करने लगा, तब हमने चीन से प्रोडक्ट को इंपोर्ट करना शुरू किया। शुरुआत में इंपोर्ट-एक्सपोर्ट लाइसेंस बनवाने में दिक्कत होती थी। इसलिए थर्ड पार्टी के जरिए प्रोडक्ट मंगवाता था। फिर खुद अपना रजिस्ट्रेशन करवाया और डायरेक्ट प्रोडक्ट इंपोर्ट करने लगा।

करण कहते हैं कि बिजनेस के मार्केटिंग पार्ट को ऊर्जा बखूबी समझती है। मुझे याद है कि जब कंपनी की शुरुआत की थी, तो सप्ताह में बमुश्किल 2 से 4 ऑर्डर ही आ पाते थे। रेंट देने का पैसा भी नहीं बच पाता था। फिर हमने मार्केटिंग पर फोकस करना शुरू किया।

ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोडक्ट की लिस्टिंग करके सेल करने लगा। डिजिटल मार्केटिंग, वीडियो-फोटोज पोस्ट शेयर करना शुरू किया।

आज हमारे पास हर रोज 100 से ज्यादा ऑर्डर आते हैं। फेस्टिव सीजन सेल के समय तो हर रोज 400 से अधिक ऑर्डर आते हैं।

कंपनी में ऊर्जा और आपका क्या रोल है?

करण कहते हैं, 'कोरोना के टाइम में हमारा बिजनेस सबसे ज्यादा बूम किया था। उसके बाद से ऊर्जा कंपनी में ऑपरेशन और प्रोडक्ट रिसर्च को देखती हैं। मैं सेल्स, मार्केटिंग, एडवर्टाइजमेंट को देखता हूं। एड के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को पैसे भी देने होते हैं। अभी हम सिर्फ एड पर 2 लाख रुपए हर महीने खर्च करते हैं।

अभी कंपनी में 4 लोगों की टीम काम कर रही है। मुझे याद है, शुरुआत में हम दोनों ही पैकेजिंग से लेकर सेलिंग और लोडिंग-अन लोडिंग का काम करते थे। पहले साल हमारा टर्नओवर 14 लाख का था। तीन साल में ही हमारी कंपनी का सालाना टर्नओवर एक करोड़ से अधिक हो चुका है।'

आखिर में करण कुछ बातें बताते हैं, जो इस बिजनेस को शुरू करने के लिए जाननी जरूरी हैं...

अगले रविवार, 21 मई को पॉजिटिव स्टोरी में पढ़ें- ...........................................................

कोरोना में नौकरी छोड़ मशरूम का बिजनेस शुरू किया, अब एक किलो मशरूम की कीमत 2.5 लाख रुपए
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