deltin55 Publish time 2026-2-12 11:46:18

‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’: सात चरणों में नीति निर्माण और वास्तविक दुनिया में एआई के इस्तेमाल पर होगा फोकस



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आगामी ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ सात चक्रों (वर्किंग ग्रुप्स) के जरिए आयोजित किया जा रहा है। ये सात चक्र आपस में जुड़े हुए सात अलग-अलग विषयों पर आधारित हैं। हर चक्र एआई के प्रभाव के एक मुख्य क्षेत्र पर ध्यान देता है और नीति निर्माण से लेकर वास्तविक दुनिया में एआई के इस्तेमाल तक ठोस कदम तय करता है। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी सामने आई है।


हर चक्र एआई के सामाजिक प्रभावों को लेकर अलग-अलग देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें लोगों को नई स्किल्स सिखाने से लेकर एआई के सही और सुरक्षित इस्तेमाल तक के विषय शामिल हैं। ये सात चक्र हैं- मानव संसाधन, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन, सुरक्षित और भरोसेमंद एआई, विज्ञान, नवाचार और कार्यक्षमता, एआई संसाधनों को सभी तक पहुंचाना और आर्थिक विकास व सामाजिक भलाई के लिए एआई।


बयान में कहा गया कि इन चक्रों के जरिए भारत एक तरफ स्थानीय समस्याओं का समाधान करना चाहता है, तो दूसरी तरफ दुनिया भर के लिए एआई से जुड़े नियम तय करने में भी भूमिका निभाना चाहता है। इस समिट के नतीजे आने वाले वर्षों में नीति निर्माताओं, निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं का मार्गदर्शन करेंगे।


दुनिया के 100 से अधिक देश इन वर्किंग ग्रुप्स के जरिए जिम्मेदार और सभी को साथ लेकर चलने वाले एआई के भविष्य को आकार देने में शामिल हुए हैं। 16 से 20 फरवरी तक होने वाली इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 15 से 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 50 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मंत्री और 40 से अधिक वैश्विक व भारतीय कंपनियों के सीईओ शामिल होने की उम्मीद है।


इस समिट की नींव तीन मुख्य सिद्धांतों पर रखी गई है, जिन्हें सूत्र कहा गया है। ये सूत्र हैं- लोग, धरती और प्रगति। ये सिद्धांत एआई पर वैश्विक सहयोग की दिशा तय करते हैं। ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ वैश्विक एआई एजेंडा तय करने वाले प्रमुख मंच के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है। सात चक्रों और तीन सूत्रों के आधार पर यह समिट एआई के विकास को लोगों के हित और देश की तरक्की से जोड़ती है।


बयान में कहा गया कि यह समिट नीति को लागू करने, नवाचार को जनहित से जोड़ने और एआई के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करती है। इसका मकसद तकनीक के विकास को समान विकास और टिकाऊ भविष्य से जोड़ना है।

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