कर्नाटक: दरगाह परिसर में महाशिवरात्रि पूजा ...
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में स्थित लाडले मशक दरगाह परिसर में स्थापित राघव चैतन्य शिवलिंग पर महाशिवरात्रि पूजा रोकने की मांग वाली याचिका पर जल्द सुनवाई पर विचार करेगा।
दरगाह प्रबंधन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से आग्रह किया कि मामले को 15 फरवरी से पहले सूचीबद्ध किया जाए, क्योंकि उसी दिन महाशिवरात्रि मनाई जानी है।
उन्होंने कहा, “कलबुर्गी में आलंद दरगाह है। अब वे वहां शिवरात्रि समारोह आयोजित करना चाहते हैं। क्या इसे 15 फरवरी से पहले सुना जा सकता है?”
सीजेआई सूर्यकांत ने मामले का उल्लेख करते हुए इस बात पर चिंता जताई कि लोग सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर रहे हैं, बिना पहले संबंधित हाईकोर्ट का रुख किए।
उन्होंने कहा, "हर मामला अनुच्छेद 32 के तहत क्यों आ रहा है? इससे यह संदेश जाता है कि कानून सुविधा के अनुसार इस्तेमाल किया जा रहा है और हाईकोर्ट निष्क्रिय हैं। हम इस पर विचार करेंगे। देखते हैं।"
विवाद के केंद्र में स्थित यह दरगाह 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी, जिन्हें लाडले मशक भी कहा जाता है, और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जुड़ी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, चैतन्य, समर्थ रामदास के गुरु थे, जिन्हें मराठा राजा छत्रपति शिवाजी सम्मान देते थे। परिसर में चैतन्य की समाधि है, जिस पर राघव चैतन्य शिवलिंग नामक संरचना बनाई गई है।
इतिहास में इस स्थल पर मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदायों के लोग पूजा-पाठ करते रहे हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में पूजा के अधिकार और स्थल के स्वरूप को लेकर तनाव बढ़ा है।
नई याचिका में दरगाह परिसर में महाशिवरात्रि पूजा पर रोक लगाने और किसी भी ऐसे निर्माण या बदलाव पर रोक लगाने की मांग की गई है जिससे स्थल का धार्मिक स्वरूप बदल सके।
याचिका में कहा गया है कि हिंदू पूजा की अनुमति देने वाले अंतरिम आदेश स्थल के धार्मिक स्वरूप को बदलने की एक संगठित कोशिश को दर्शाते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस साल की महाशिवरात्रि से पहले यथास्थिति बनाए रखने और किसी भी संरचनात्मक या धार्मिक बदलाव को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
यह विवाद पिछले साल भी महाशिवरात्रि के दौरान सामने आया था। फरवरी 2025 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सीमित संख्या में हिंदू श्रद्धालुओं को नियंत्रित परिस्थितियों में राघव चैतन्य शिवलिंग पर पूजा की अनुमति दी थी। आदेश के तहत हिंदू समुदाय के 15 लोगों को तय समय पर और सख्त प्रशासनिक व सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूजा करने की अनुमति दी गई थी।
इससे पहले भी दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित कर इसी तरह की सीमित अनुमति दी गई थी, ताकि टकराव से बचा जा सके।
https://www.deshbandhu.co.in/images/authorplaceholder.jpg
Deshbandhu
KarnatakaSupreme CourtMahashivratri
Next Story
Pages:
[1]