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हक की खातिर पत्थर बनी पत्नी: जब तक देवर ने नहीं लौटाई जमीन, दो दिन तक घर में रखा पति का शव

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प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



जागरण संवाददाता, बनियाठेर (संभल)। तीन बीघा जमीन पर अपना हक पाने के लिए महिला को अपने पति का शव दो दिन तक घर में रखना पड़ा। इस भूमि को उसके ही देवर ने बिना संज्ञान में डाले अपने नाम करवा लिया था। रिश्तेदार के छल और ग्रामीणों से भी महिला को न्याय नहीं मिला तो उसने बीमारी से दम तोड़ने के बाद पति के शव का अंतिम संस्कार ही नहीं किया।

मामले की जानकारी पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर महिला को समझाया और महिला के नाम में ही उक्त भूमि के बैनामा की प्रक्रिया कराई। इसके बाद महिला ने पति के शव का अंतिम संस्कार किया। मामला थाना क्षेत्र के कासमपुर जगरूप गांव का है। गांव निवासी उल्फत की शादी 20 वर्ष पहले अंगूरी देवी के साथ हुई थी।

शादी के बाद उनकी कोई संतान नहीं हुई। उल्फत का एक भाई महेश भी है। 10 फरवरी यानी मंगलवार की रात्रि उल्फत के पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई तो पत्नी उसे लेकर डाक्टर को दिखाने गई। दवा लेकर घर वापस लौट आई। फिर देर रात 12 बजे करीब उल्फत ने दम तोड़ दिया। चीख पुकार की आवाज सुनकर स्वजन व आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।

अगले दिन मृतक की पत्नी अंगूरी देवी को यह जानकारी हुई कि उसके बिना संज्ञान में डाले देवर महेश ने उसकी 10 बीघा जमीन चोरी-छिपे अपने नाम करा ली है। इस पर उसने देवर से जमीन वापस करने को कहा तो उसने इन्कार कर दिया। ग्रामीणों ने समझाया लेकिन अंगूरी देवी ने अंतिम संस्कार तब तक करने से इन्कार कर दिया, जब तक उसे जमीन वापस नहीं मिल जाती।

मामले में गुरुवार को पत्नी ने पुलिस से मौखिक शिकायत करते हुए इस प्रकरण के बारे में अवगत कराया। फिर पुलिस हरकत में आई और गांव पहुंच गई। पुलिस की दखल के बाद देवर महेश तीन बीघा जमीन देने को राजी हो गया। इसके बाद वह अपनी भाभी अंगूरी देवी को लेकर तहसील पहुंचा और वहां पर जमीन का बैनामा की प्रक्रिया कर नाम करवा दी।

थाना प्रभारी मनोज वर्मा ने बताया कि महिला ने जमीन वापस दिलवाने की मांग को लेकर पति के शव का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया था। बाद में उसे तीन बीघा जमीन दिलवाई गई। तब जाकर उसने अंतिम संस्कार किया है।




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