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बिहार में कृषि रोड मैप से मिली सफलता, फसल चक्र और जिलेवार खेती के प्रति जागरूक करेगी सरकार

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मंत्री रामकृपाल यादव (फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार ने कृषि रोड मैप के माध्यम से बड़ी सफलता प्राप्त की है। बिहार के मगही पान, मिथिला मखाना, मर्चा धान सहित कई जीआइ टैग प्राप्त कृषि उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसी क्रम में दीघा मालदा, सोनाचूर चावल जैसे कृषि उत्पादों को जीआई टैग दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उक्त बातें कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कही।

मंत्री कृषि विभाग की ओर से राज्य की खेती को प्रगतिशील एवं लाभकारी बनाने के लिए गुरुवार को बामेती सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। बिहार में प्रगतिशील एवं लाभकारी कृषि पद्धतियां विषय पर आयोजित कार्यशाला में कृषि अर्थशास्त्री, कृषि वैज्ञानिक और नीति निर्माता मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि कृषि रोड मैप के जरिए फलों और सब्जियों का तेजी से उत्पादन बढ़ा है। धान एवं गेहूं की जगह दलहन और कैश क्राप फसलों के उत्पादन एवं निर्यात को बढ़ावा दिया जा रहा है। खेती को लाभकारी बनाने के लिए फसल चक्र एवं जिलेवार खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कार्यशाला में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (आइसीआरआइइआर), नई दिल्ली के प्रोफेसर पद्मश्री डॉ. अशोक गुलाटी ने कहा कि बीते 20 वर्षों में बिहार का जीडीपी ग्रोथ भारत से ज्यादा रहा है। बिहार की भौगोलिक दशाएं कृषि के लिए उपयुक्त हैं। ये इसकी धरोहर हैं। इसका सही इस्तेमाल जरूरी है। मछली पालन, पोल्ट्री, दलहन उत्पादन, गन्ना उद्योग आदि के माध्यम यहां खेती को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बाजार को ध्यान में रखकर किसानों से खेती कराई जाए तो इसका लाभ उन्हें मिलेगा। उत्तर बिहार में गन्ना एवं दक्षिण बिहार में दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देना चाहिए। मखाना के साथ मछली पालन कर किसान अधिक लाभ कमा सकते हैं।

इस मौके पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. पीएस पांडेय ने कहा कि बिहार की जलवायु एवं मिट्टी कृषि के काफी अनुकूल है। कृषि को लाभकारी बनाना होगा, तभी हमारे किसानों की आय बढ़ेगी।

वहीं, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाएं। नई तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि संभव है।
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