deltin33 Publish time 2026-2-13 09:26:50

NHAI की अनदेखी से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे बना ‘मौत का हाईवे’, हर साल 400 से ज्यादा लोगों की जा रही जान

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खांडसा गांव के पास खुले नाले में लोगों द्वारा डाली गई गंदगी और टूटी पड़ी रेलिंग। जागरण



विनय त्रिवेदी, गुरुग्राम। सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर हर महीने जिला प्रशासन बैठक कर बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन इन दावों पर अमल नहीं हो पाता। अमल होता तो सूरत कुछ और होती और हर साल चार सौ से ज्यादा लोगों की जाने नहीं जातीं। एक बार फिर एनएचएआइ की लापरवाही के करण एक और व्यक्ति की जान चली गई।

शहर के बीचोंबीच व घनी आबादी वाले क्षेत्र से गुजरा दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे मौत का एक्सप्रेसवे साबित होता जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे पर हर साल दो सौ से ज्यादा मौतें हो रही हैं। कहीं सड़क की इंजीनियरिंग में खामी है तो कहीं घोर लापरवाही की वजह से जान जा रही है।
कई जगहों से टूटी है रेलिंग

इस एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ किनारे पांच फीट से ज्यादा घहराई वाले बरसाती नाले हैं, लेकिन हादसों को रोकने के लिए नालों के पास लगी रेलिंग कई जगहों पर टूटी हुई है। साथ ही नाले भी खुले हुए हैं। इसे ठीक कराने के लिए एनएचएआइ लगातार शिथलता बरता रहा है।

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बुधवार शाम सेक्टर 37 में बेस्टेक बिल्डिंग के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से स्कूटी सवार व्यक्ति हाईवे किनारे रेलिंग से टकराते हुए नाले में जा गिरा और उसकी मौत हो गई। हालांकि, जहां घटना हुई, वहां रेलिंग तो टूटी नहीं थी, लेकिन रेलिंग की ऊंचाई काफी कम थी और नाला भी खुला था।

इससे व्यक्ति के सिर में गहरी चोट आई। अगर नाला बंद होता तो शायद जान बच सकती थी। यहां की ऊंचाई महज एक फीट है, जबकि कम से कम ऊंचाई ढाई से तीन फीट होनी चाहिए।

इससे पहले भी पिछले साल खांडसा गांव के पास एक महिला भी इसी तरह हादसे के बाद नाले में गिर गई थी जिससे उसकी जान चली गई थी। दोबारा इस तरह की घटना ने एनएचएआइ की लापरवाही को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
राजीव चौक से खेड़कीदौला तक खुला है नाला

हाईवे पर राजीव चौक से खेड़कीदौला तक दोनों तरफ बरसाती नाला खुला हुआ है। कहीं पर इसकी गहराई पांच फीट तो कहीं-कहीं पर दो फीट से कम है। दोनों तरफ के नाले ढके न होने से इसमें आसपास के लोग कूड़ा भी डाल देते हैं।

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इससे यह नाले गंदगी से अटे पड़े हैं। खांडसा गांव के पास एक्सप्रेसवे के एग्जिट व एंट्री के नजदीक नालों के ऊपर ढक्कन नहीं है, बल्कि यहां पर रेलिंग भी टूटी हुई है। 20 किलोमीटर के इस हाईवे पर कई जगहों पर दोनों तरफ नालों के पास लगी रेलिंग तक टूटी है।

ऐसे में हर समय खुले नाले में बाइक या साइकिल सवार के गिरने की आशंका रहती है। इसके बावजूद एनएचएआइ प्रबंधन इस ओर कोई सटीक कदम नहीं उठा रहा है।

जानकारों का कहना है कि दिल्ली-जयपुर हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव काफी अधिक है और यह आबादी के बीच से गुजरा हुआ है, ऐसे मेें नालों के ऊपर ढक्कन होना चाहिए। नालों के ऊपर ढक्कन होने से उसमें लोग गंदगी भी नहीं डाल पाएंगे।

ट्रैफिक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि हाईवे पर रेलिंग को ठीक करने और सड़क सुरक्षा को लेकर कई बार एनएचएआइ से पत्राचार किया जा चुका है।
हर साल जिले में हो रही मौतें



    साल हादसे घायल मौत


   2022
   1040
   886
   404


   2023
   1172
   874
   494


   2024
   1019
   750
   478


   2025
   1115
   770
   472




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