cy520520 Publish time 2026-2-13 12:27:11

महाशिवरात्रि 2026 पर बन रहा चार ग्रहों का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त व पूजा विधि

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Shiva Puja Vidhi With Muhurat: इस बार के संयोग को विद्वान अत्यंत शुभ और फलदायी मान रहे हैं।



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Mahashivratri 2026 Astrology Significance: महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को विशेष ज्योतिषीय संयोग में मनाई जाएगी। इस बार सूर्य, बुध, शुक्र और राहु का अद्भुत योग बन रहा है, जिसे विद्वान अत्यंत शुभ और फलदायी मान रहे हैं।

मान्यता है कि इस दिव्य संयोग में व्रत और पूजन करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रभात मिश्र और आचार्य विवेक तिवारी के अनुसार महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक है।
शुभ मुहूर्त (Mahashivratri 2026)

[*]चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 3:59 बजे
[*]चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 4:45 बजे
[*]सायं काल पूजा: शाम 5:36 बजे से
[*]निशीथ काल (मुख्य पूजा समय): रात्रि लगभग 12:00 से 12:52 बजे तक


रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। श्रद्धालु प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग अभिषेक कर सकते हैं।
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व

शिव पुराण के अनुसार इस दिन द्वादश ज्योतिर्लिंग प्रकट हुए थे। साथ ही यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का भी प्रतीक है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
पूजन सामग्री (Checklist)

[*]पूजा आरंभ करने से पहले निम्न सामग्री एकत्र कर लें:
[*]शुद्ध जल और गंगाजल
[*]कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत के लिए)
[*]बेलपत्र (कम से कम तीन, त्रिदल वाला)
[*]धतूरा, भांग, शमी के पत्ते
[*]चंदन (सफेद या अष्टगंध), अक्षत (अखंडित चावल), भस्म
[*]सफेद फूल (मदार, कनेर), बेर और गन्ना
[*]धूप, दीपक (घी का), कपूर और मौली

पूजा की संपूर्ण विधि

1. सुबह की तैयारी: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। संभव हो तो जल में गंगाजल मिलाएं। स्वच्छ वस्त्र धारण कर जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर या शिवालय में पूजन प्रारंभ करें।

2. जलाभिषेक: सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

3. पंचामृत अभिषेक: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद पुनः शुद्ध जल चढ़ाएं।

4. श्रृंगार और अर्पण : शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं। भस्म और अक्षत अर्पित करें।

“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए बेलपत्र चढ़ाएं। ध्यान रखें कि बेलपत्र कटा-फटा न हो और चिकना भाग ऊपर की ओर रहे। धतूरा, भांग, शमी पत्र और फल अर्पित करें।

5. धूप-दीप और मंत्र जाप : भगवान के समक्ष घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है।

6. आरती और क्षमा प्रार्थना :अंत में भगवान शिव की आरती (जैसे — “जय शिव ओंकारा”) करें। पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए मन ही मन क्षमा याचना करें।

महाशिवरात्रि की रात जागरण और चार प्रहर पूजा करने का विशेष महत्व है। यदि संभव हो तो शाम से लेकर प्रातः तक चार बार अलग-अलग अभिषेक करें।

यह पावन पर्व भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का अवसर है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया पूजन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करता है।
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