जीविका दीदियों ने मशरूम की खेती से बदली अपनी तकदीर, कम लागत में ज्यादा मुनाफा
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/13/article/image/Mushroom-Farming-1770972175289_m.webpजीविका दीदियों ने मशरूम की खेती से बदली अपनी तकदीर, कम लागत में ज्यादा मुनाफा
संवाद सूत्र, रामपुर। स्थानीय प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में जीविका दीदि मशरूम की खेती कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। कम लागत, कम जगह और कम समय में बेहतर उत्पादन देने वाली मशरूम की खेती ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का सशक्त माध्यम तैयार कर दिया है।
आज प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों गांवों में महिलाएं बटर और आयस्टर मशरूम की खेती कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि परिवार के भरण-पोषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कुडारी पंचायत के सिसवार गांव की किरण देवी पिछले तीन माह से बटर मशरूम की खेती कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि जीविका समूह के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी मिली। जिसके बाद उन्होंने छोटे स्तर पर उत्पादन शुरू किया। शुरुआती दिनों में थोड़ी झिझक जरूर थी, लेकिन अब नियमित उत्पादन होने लगा है।
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स्थानीय बाजार में मशरूम की अच्छी मांग है, किरण देवी कहती हैं कि अब घर की जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इसी प्रकार जलालपुर पंचायत की तेतरा देवी, पाली गांव की परमिला देवी और कांति देवी भी तीन माह से बटर मशरूम की खेती कर रही हैं।
इन महिलाओं ने बताया कि पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन अब स्वरोजगार से जुड़कर आत्मविश्वास बढ़ा है। स्थानीय व्यापारी खुद गांव आकर मशरूम खरीद ले जाते हैं, जिससे बाजार तक ले जाने की समस्या भी नहीं रहती। पसाई पंचायत के माझियाव गांव की सुनीता देवी और खरेंदा पंचायत के हुडरा गांव की लीलावती देवी आयस्टर मशरूम की खेती कर रही हैं।
उनका कहना है कि आयस्टर मशरूम की खेती अपेक्षाकृत आसान है और कम समय में उत्पादन मिल जाता है। तीन माह के भीतर ही लाभ दिखने लगा है। जीविका समूह की बैठकों में ये महिलाएं अन्य सदस्यों को भी इस खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
प्रखंड क्षेत्र में जीविका परियोजना के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण, बीज, खाद और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मशरूम उत्पादन से जुड़ रही हैं। मशरूम पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण स्तर सुधारने में भी सहायक साबित हो रहा है।
इस संबंध में जीविका के बीपीएम अनिल कुमार चौबे ने बताया कि प्रखंड में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीविका का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। आने वाले समय में और अधिक समूहों को इस योजना से जोड़ा जाएगा तथा विपणन व्यवस्था को भी सुदृढ़ करने का प्रयास किया जाएगा।
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