व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अड़चन? सुप्रीम कोर्ट ने कहा—दमनात्मक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं, लखीसराय की दंपती को बड़ी राहत
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/13/article/image/Supreme-Court-Criticizes-Jharkhand-Govt-Grants-Bail-to-Vinay-Singh-1770991748405_m.webpजागरण संवाददाता, लखीसराय। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के बड़े कारोबारी एवं लखीसराय निवासी विनय कुमार सिंह और उनकी पत्नी को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार की कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने जमानत प्रदान करते हुए कहा कि लगातार एफआईआर दर्ज कर किसी अभियुक्त को हिरासत में बनाए रखने का प्रयास न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग जैसा प्रतीत होता है।
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि राज्य की एजेंसियां एक के बाद एक प्राथमिकी दर्ज कर उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन कर रही हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें अनुच्छेद 32 को संविधान का “हृदय और आत्मा” बताया गया है। पीठ ने कहा कि मौलिक अधिकारों के प्रथम दृष्टया उल्लंघन की स्थिति में शीर्ष अदालत हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगी।
एक नजर इधर भी
[*]लगातार एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कारोबारी विनय सिंह को बड़ी राहत
[*]क्या न्यायिक प्रक्रिया का हुआ दुरुपयोग? सुप्रीम कोर्ट ने दी विनय सिंह को जमानत
[*]एक के बाद एक एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, झारखंड सरकार पर सवाल
[*]15 साल बाद एफआईआर और रिमांड पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, विनय सिंह को राहत
[*]अनुच्छेद 32 का हवाला, सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी दंपति को दी बड़ी राहत
मामले में पहले एसीबी, रांची द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद हजारीबाग और जगन्नाथपुर थाने में भी नए मामले दर्ज हुए। कोर्ट ने इस बात पर प्रश्न उठाया कि वर्ष 2010 के भूमि म्यूटेशन प्रकरण में 15 वर्ष बाद एफआईआर दर्ज करना और एक मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद अन्य मामलों में रिमांड लेना संदेह पैदा करता है।
पीठ ने कहा कि किसी अभियुक्त का जांच में अपेक्षित सहयोग न करना यह अर्थ नहीं देता कि वह अपनी सुविधा से स्वीकारोक्ति दे। अदालत ने 24 और 26 नवंबर 2025 को दर्ज दो एफआईआर में विनय कुमार सिंह को तत्काल जमानत देने का आदेश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, बशर्ते वह जांच में सहयोग करें।
विशेष अनुमति याचिका को आपराधिक अपील में परिवर्तित करते हुए अंतरिम जमानत को स्थायी कर दिया गया। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी चार्जशीट दाखिल होने के बाद अंतरिम आदेश जारी रखने पर आपत्ति नहीं जताई। उल्लेखनीय है कि विनय कुमार सिंह, बिहार विधान परिषद सदस्य अजय कुमार सिंह के भाई हैं और झारखंड में उनका व्यापक व्यवसाय है।
Pages:
[1]