cy520520 Publish time 2026-2-13 23:27:47

हरियाणा के 8 HCS अधिकारियों के IAS बनने का रास्ता साफ, 18 साल बाद दायर चार्जशीट रद

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हरियाणा के 8 HCS अधिकारी बनेंगे IAS। सांकेतिक फोटो



दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा राज्य विजिलेंस ब्यूरो को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने 2001 बैच के हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) अधिकारियों के चयन में अनियमितताओं से जुड़े मामले में जून 2023 में दायर चार्जशीट को रद कर दिया है।

अदालत के इस आदेश से एचसीएस अधिकारी जगदीप ढांडा सहित आठ एचसीएस अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। अब उनके लिए पदोन्नति कोटे से भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी (आइएएस) बनने का रास्ता साफ हो गया है। अब प्रदेश सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा कि उन्हें आइएएस बनाया जाता है अथवा नहीं, लेकिन इन एचसीएस अधिकारी दावेदारी मजबूत हो गई है।

जस्टिस जेएस पुरी ने जगदीप ढांडा और अन्य अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि 18 वर्ष बाद याचिकाकर्ताओं के नाम उस एफआइआर से संबंधित चार्जशीट में शामिल किए गए, जिससे उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।

अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं को न तो एफआइआर में आरोपित बनाया गया था और न ही उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र जांच की गई थी। इसलिए चार्जशीट कानून के अनुरूप नहीं है और इसे अवैध माना जाता है।

अदालत ने 30 जून 2023 को दायर चार्जशीट को याचिकाकर्ताओं के संबंध में निरस्त करने का आदेश दिया। इस फैसले से राहत पाने वाले एचसीएस अधिकारियों में जगदीप ढांडा के अलावा कुलधीर सिंह, सुरिंदर सिंह, वीना हुड्डा, जग निवास, कमलेश भादू, वत्सल वशिष्ठ और सरिता मलिक शामिल हैं।

इन अधिकारियों के नाम पहले ही राज्य सरकार द्वारा आइएएस के पद पर पदोन्नति के लिए तैयार पैनल में भेजे जा चुके थे, लेकिन चार्जशीट दायर होने के कारण उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो गई थी।

याचिकाकर्ताओं के वकील इंद्रपाल गोयत ने अदालत को बताया कि वर्ष 2002 में हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा किए गए चयन को चुनौती देने वाली एक याचिका अभी भी हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष लंबित है।

इसके अतिरिक्त 18 अक्टूबर 2005 को दर्ज एफआइआर संख्या 20 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से संबंधित थी, जिसका इन अधिकारियों के चयन से कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद 18 वर्ष बाद उनके नाम चार्जशीट में शामिल कर दिए गए।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि जून 2023 में चार्जशीट दाखिल करने का उद्देश्य उनकी आइएएस पदोन्नति प्रक्रिया को प्रभावित करना था, क्योंकि जुलाई 2022 में राज्य सरकार ने उनके नाम संघ लोक सेवा आयोग को भेज दिए थे। चार्जशीट दाखिल होने के बाद आयोग ने उनके मामलों पर आगे विचार नहीं किया। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब इन अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना बन गई है।
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