रांची के मधुकम में भवनों के तोड़ने की कार्रवाई पर हाई कोर्ट की रोक, प्रशासन से मांगा जवाब
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/Jharkhand-HC-1771029418498_m.webpराज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में रांची के मधुकम में दखल दिहानी को लेकर भवनों को तोड़ने की कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद अदालत ने जिला प्रशासन की कार्रवाई पर रोक लगा दी है और किसी प्रकार की पीड़क कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। अदालत ने हेहल अंचलाधिकारी से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि जब प्रार्थियों को नोटिस जारी किया गया था तो उनकी ओर से दिए गए जवाब पर क्या निर्णय लिया गया है।
इसकी जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। इस संबंध में रौनक कुमार सहित 11 लोगों की ओर से याचिका दाखिल की गई है। उनकी ओर से हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया था।
प्रार्थियों का कहना था कि जिस जमीन पर वह रह रहे हैं, उसका सेटलमेंट एग्रीमेंट है और उन्होंने करीब सवा करोड़ रुपये खर्च कर मकान निर्माण कराया है। उनका आरोप है कि मूल याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष इन तथ्यों को छिपाया है। हस्तक्षेप कर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा।
बता दें कि महादेव उरांव ने अपनी 48 डिसमिल जमीन खाली कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस पर हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2024 में संबंधित जमीन को खाली कराने का निर्देश हेहल सीओ को दिया था।
हाल ही में जिला प्रशासन ने खड़गड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 मकानों को हटाने का आदेश जारी किया है। प्रशासन की इस कार्रवाई का स्थानीय निवासियों ने कड़ा विरोध किया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये की दर से जमीन खरीदने के लिए भुगतान किया था। करीब 38.25 डिसमिल जमीन पर मकान बनाकर वह वर्षों से रह रहे हैं। उनका दावा है कि कुल मिलाकर लगभग 1. 8 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। अब उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है।
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