झारखंड में बुजुर्गों की सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य स्थिति पर अध्ययन शुरू, 45 साल से अधिक आयु के लोग शामिल
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/Ranchi-News-(32)-1771030096941_m.webpसांकेतिक तस्वीर
राज्य ब्यूरो, रांची। देश में तेज़ी से बढ़ रही बुजुर्ग आबादी की बदलती सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझने के लिए केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश पर अध्ययन शुरू हुआ है। झारखंड में भी इस अध्ययन के लिए टीम ने काम संभाल लिया है।
लांगिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया वेव-2 सर्वेक्षण के लिए झारखंड में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत 31 जनवरी 2026 से की गई है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फार पापुलेशन साइंसेज (आइआइपीएस) मुंबई द्वारा इसे संचालित किया जा रहा है।
इस व्यापक अध्ययन का उद्देश्य देश में 45 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के व्यक्तियों तथा उनके जीवनसाथियों की स्वास्थ्य स्थिति, आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक सहभागिता, पारिवारिक संरचना और जीवन की गुणवत्ता का दीर्घकालिक और वैज्ञानिक आकलन करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में औसत आयु बढ़ने के साथ बुजुर्गों से जुड़ी बीमारियों, आर्थिक निर्भरता, सामाजिक अलगाव और देखभाल की चुनौतियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह अध्ययन नीतिगत निर्णयों के लिए ठोस आधार उपलब्ध कराते हैं। सर्वेक्षण के फील्ड कार्य की जिम्मेदारी आरडीआइ प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली को सौंपी गई है।
आरडीआइ के प्रोजेक्ट को-आर्डिनेटर जीतेंद्र कुमार दुबे ने बताया कि राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत सर्वेक्षण से जुड़े अधिकारियों और फील्ड कर्मियों को अध्ययन की कार्यप्रणाली, डेटा संग्रहण की आधुनिक तकनीकों, साक्षात्कार प्रक्रिया तथा गुणवत्ता नियंत्रण के मानकों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है, ताकि एकत्रित आंकड़े सटीक, विश्वसनीय और राष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय हों।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के बाद झारखंड के विभिन्न जिलों में चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण का फील्ड कार्य शुरू किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन झारखंड सहित पूरे देश में बुजुर्गों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
अध्ययन से प्राप्त आंकड़े न केवल बुजुर्गों की वास्तविक जीवन परिस्थितियों को उजागर करेंगे, बल्कि पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, सामाजिक सुरक्षा, और सक्रिय वृद्धावस्था से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी और ज़मीनी जरूरतों के अनुरूप बनाने में भी सहायक होंगे। यह सर्वेक्षण भविष्य में केंद्र और राज्य सरकारों को वृद्धजन कल्याण से जुड़ी नीतियों की दिशा और प्राथमिकताएं तय करने में मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
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