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दवा नहीं, जहर बन सकती है बिना परामर्श ली गई एंटीबायोटिक्स; विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता

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जहर बन सकती है बिना परामर्श ली गई एंटीबायोटिक्स



जागरण संवाददाता, रांची। एंटीबायोटिक्स के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। हटिया के सिंह मोड़ स्थित राइस एकेडमी स्कूल में आयोजित एएमआर प्रहार एंटीबायोटिक्स पर लापरवाही नहीं चलेगी अभियान के दौरान रांची के फिजिशियन डॉ. सुमित झा ने कहा कि एंटीबायोटिक्स का अधिक और बिना जांच उपयोग सीधे तौर पर लीवर और किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि बिना चिकित्सकीय परामर्श दवाइयों का सेवन लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। डा. झा ने बताया कि एंटीबायोटिक्स शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकती है, खासकर तब जब इन्हें अनावश्यक रूप से लिया जाए।

सर्दी, खांसी और सामान्य बुखार जैसी समस्याओं में लोग बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक्स खरीदकर सेवन कर रहे हैं, जो आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
एंटीबायोटिक दवाएं शरीर के लिए घातक

उन्होंने कहा कि बार-बार बाजार से खरीदकर ली गई एंटीबायोटिक दवाएं शरीर के लिए घातक सिद्ध हो सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई दुकानदार दवाइयों की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से एंटीबायोटिक्स को अन्य दवाओं के साथ दे रहे हैं।

आम लोगों में मेडिकल संबंधी जानकारी की कमी के कारण एंटीबायोटिक्स की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार को नियमित जांच और सख्त निगरानी करनी होगी। साथ ही, लोगों में एंटीबायोटिक्स के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा नहीं लेनी चाहिए

राइस एकेडमी के डायरेक्टर विजय कुमार शर्मा ने कहा कि हर दवा उपयोगी होती है, लेकिन उसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए। वहीं स्कूल की प्राचार्या रीता विश्व ने कहा कि एंटीबायोटिक्स सही तरीके से और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ली जाए तो लाभकारी होती है, अन्यथा यह नुकसान भी पहुंचा सकती है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। विशेषज्ञों ने सभी से अपील की कि एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल डाक्टर की सलाह से ही करें और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।

एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग पर आज की जानकारी बेहद जरूरी और जागरूक करने वाली रही। हम अक्सर छोटी-छोटी बीमारियों में बिना डाक्टर की सलाह दवा ले लेते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकती है। इस कार्यक्रम से हमें समझ में आया कि एंटीबायोटिक्स का सेवन सोच-समझकर और चिकित्सकीय परामर्श से ही करना चाहिए।- दीपा कुमारी, शिक्षिका


कार्यक्रम में डॉक्टर द्वारा दी गई जानकारी ने हमारी आंखें खोल दीं। पहले हमें लगता था कि एंटीबायोटिक्स हर बीमारी में तुरंत राहत देती है, लेकिन अब पता चला कि इसका गलत उपयोग लिवर और किडनी पर बुरा असर डाल सकता है। बिना जांच और सलाह के दवा लेना खतरनाक है। सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी जिम्मेदारी समझनी होगी।- प्रमिला कुमारी

एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध उपयोग से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, यह बात जानकर मैं हैरान रह गई। अक्सर लोग सर्दी-खांसी या बुखार में खुद से दवा खरीद लेते हैं, जो सही नहीं है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समय-समय पर होने चाहिए, ताकि लोग सही जानकारी प्राप्त कर सकें और गलत आदतों से बच सकें।- कौशल्या कुमारी

आज के कार्यक्रम से यह स्पष्ट हो गया कि हर दवा लाभकारी तभी है जब उसे डॉक्टर की सलाह से लिया जाए। मेडिकल जानकारी की कमी के कारण लोग आसानी से एंटीबायोटिक्स खरीद लेते हैं, जो भविष्य में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। हम सभी को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना होगा और दूसरों को भी जागरूक करना होगा।- शर्मिला कुमारी
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