LHC0088 Publish time 2026-2-14 12:57:45

असम में हाईवे पर इमरजेंसी रनवे, भारत का दमखम देख चीन हो जाएगा बेचैन; समझिए इसके मायने

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ईएलएफ पर एयरक्राफ्ट की लैंडिंग।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज असम दौरे पर हैं। इस दौरान डिब्रूगढ़-मोरान इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) पर किसी भी प्रधानमंत्री का विमान पहली बार उतरा। इसके महत्व के पीछे चीन का फैक्टर भी है।

इमरजेंसी के दौरान इस पर इंडियन एयर फोर्स (IAF) के फ्रंटलाइन फाइटर जेट और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को उतारा जा सकता है। इस इलाके के दक्षिण-पूर्व में भारत खास तौर पर कमजोर है। ऐसे में समझते हैं इसकी अहमियत।
क्यों है ये महत्वपूर्ण?

लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन से मुकाबला करने के लिए भारतीय वायुसेना के कई बेस हैं। दूसरा राफेल स्क्वाड्रन बंगाल के उत्तर और भूटान के दक्षिण में हाशिमारा में है। इसीलिए डोकलाम संकट के दौरान भारत तैयार था कि अगर चीन की तरफ से पास आने की कोई कोशिश हुई तो वे इस इलाके को ब्लॉक करने की कोशिश करेंगे।

दूसरे बेस तेजपुर, जोरहाट और चबुआ में हैं। चीन की तरफ कम से कम सात एयर बेस हैं। युद्ध की स्थिति में भारत के एयरबेस टारगेट बन जाएंगे, इसीलिए भारत को दूसरी जगहों की जरूरत है जहां फाइटर जेट तैनात किए जा सकें।
किस तरह से होगा इस्तेमाल?

पार्क किए गए फाइटर जेट जमीन पर हमले के लिए बहुत कमजोर होते हैं। यहीं पर इमरजेंसी लैंडिंग की सुविधा काम आती है। ELF को मजबूत बनाया गया है और यह लैंडिंग के लिए काफी लंबा और चौड़ा है। इस्तेमाल से पहले हाईवे को ट्रैफिक के लिए सील कर दिया जाएगा और सैनिक इलाके को सुरक्षित कर लेंगे।

यहां उतरने वाले एयरक्राफ्ट में जल्दी से फ्यूल भरा जा सकता है और उन्हें फिर से हथियारबंद किया जा सकता है। सिर्फ लड़ाई के लिए ही नहीं, बल्कि ELF का इस्तेमाल इंसानी काम के लिए भी किया जा सकता है।

आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने C-130J एयरक्राफ्ट में सवार होकर नॉर्थ-ईस्ट के पहले ELF पर ऐतिहासिक लैंडिंग की। पीएम मोदी ने चाबुआ एयरफील्ड से उड़ान भरी थी और मोरन में ELF पर उतरे।

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