गुरुग्राम में रिटायरमेंट के दिन भी नहीं छोड़ी घूसखोरी, 10 हजार रुपए लेते रंगे हाथों पकड़ा गया सीनियर मैनेजर
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/BRIBE-1771056508830_m.webpरिटायरमेंट के दिन रिश्वत लेते पकड़े गए वरिष्ठ प्रबंधक। (AI Generated Image)
महावीर यादव, बादशाहपुर (गुरुग्राम)। लालच का अंत अपमान में होता है।मानेसर के हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) में सीनियर मैनेजर दलबीर सिंह भाटी की मात्र 10 हजार रुपये की रिश्वत मामले में गिरफ्तारी और अदालत से पांच साल की सजा ने इस कहावत को सजीव कर दिया।
रिश्वत लेते एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने उस समय गिरफ्तार किया था। जब 30 सितंबर 2021 को कार्यालय में दलबीर सिंह भाटी की रिटायरमेंट की फेयरवेल पार्टी चल रही थी। निगम में सफाई ठेकेदार के 4.25 लाख रुपये के बिल पास करने की एवज में रिश्वत मांगी गई थी।
अदालत ने सबूतों के आधार पर दोषी करार दिया
अदालत ने सबूत और गवाहों के आधार पर दलबीर सिंह भाटी को दोषी करार दिया। अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई है। उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा ना करने की स्थिति में तीन महीने अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
अदालत ने 42 पन्ने के फैसले में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार करने वालों पर तीखी टिप्पणी की। कहा कि भ्रष्टाचार जैसे अपराधों में नरमी न्याय व्यवस्था और समाज के साथ अन्याय है। अदालत ने साफ किया कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी अधिक होती है। उनके अपराध का प्रभाव भी व्यापक होता है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत सहगल की अदालत ने वरिष्ठ प्रबंधक दलबीर सिंह भाटी को दोषी करार देकर सजा सुनाने का आदेश दिया। वह अदालत के सामने गिड़गिड़ाया कि वह हृदय रोग तथा अन्य कई शारीरिक बीमारियों से पीड़ित है।
यह भी पढ़ें- दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर हादसा, वाहन की टक्कर से नाले में गिरे स्कूटी सवार व्यक्ति की मौत
वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। उसे अपनी पत्नी और पुत्र का भरण-पोषण करना होता है। उसकी पत्नी भी हृदय रोग से पीड़ित है। उसके अनुपस्थित रहने पर परिवार की देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि दलबीर सिंह भाटी ने गंभीर अपराध किया है। ज्यादा से ज्यादा सजा दी जाए ताकि समाज में इसका बेहतर संदेश जाए।
कम सजा देने से समाज का नुकसान
अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसले में कहा कि सजा इतनी हल्की नहीं होनी चाहिए कि वह समाज की अंतरात्मा को झकझोर दे। कम सजा देने से अपराधियों को प्रोत्साहन मिलता है। समाज को नुकसान होता है।
अनुचित सहानुभूति के कारण अपर्याप्त सजा देने से न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर पड़ता है। न्यायालय का कर्तव्य है कि अपराध की प्रकृति और उसके निष्पादन के तरीके को ध्यान में रखते हुए उचित सजा दे।
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात के तहत दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष की सजा तथा पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यदि जुर्माना अदा नहीं किया जाता है तो अतिरिक्त तीन महीने की कठोर सजा भुगतनी होगी।
क्या था मामला
मामला मानेसर एचएसआइआइडीसी में सफाई ठेकेदार अजीत कुमार की शिकायत पर दर्ज हुआ था। ठेकेदार अजीत सिंह ने एसीबी को दी शिकायत में कहा कि उसके सफाई के 4.25 लाख रुपये के बिल पास होने हैं।
बिल पास करने की एवरेज में एचएसआइआइडीसी का वरिष्ठ प्रबंधक दलबीर सिंह भाटी 10,000 रुपये की रिश्वत मांग रहा है।
30 सितंबर 2021 को विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर दलबीर सिंह भाटी को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। जब वह रकम अपनी जेब में रख चुका था। जांच के दौरान फेनालफ्थेलीन टेस्ट में भी दलबीर सिंह भाटी के हाथ गुलाबी हो गए। जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।
यह भी पढ़ें- महाराष्ट्र से गुरुग्राम वैलेंटाइन मनाने पहुंची गर्लफ्रेंड, पत्नी ने पीछा कर पकड़ा; बीच सड़क पर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
Pages:
[1]