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हिमाचल प्रदेश में 41 हजार लोग मरने के बाद भी ले रहे थे पेंशन, कैसे पकड़ में आया मामला?

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हिमाचल प्रदेश में 41 हजार लोग मरने के बाद भी पेंशन ले रहे थे। प्रतीकात्मक फोटो



राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में 41 हजार लोग मरने के बाद भी पेंशन ले रहे थे। सरकार के प्रयासों से इसका खुलासा हुआ था तो करोड़ों रुपये की चोरी रोकी गई। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं शासन) गोकुल बुटेल ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस से लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने सहित डाटा प्रमाणीकरण से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लग रहा है।

41 हजार से अधिक लोग मृत्यु के बाद भी पेंशन ले रहे थे, इस कारण हर माह पांच करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। ऐसे में डाटा प्रमाणीकरण से यह नुकसान रोका है।
पोर्टल से एकत्र किया जा रहा डाटा

उन्होंने कहा कि हम परिवार पोर्टल के माध्यम से विभिन्न विभागों का डाटा एकत्र किया जा रहा है। इससे अब प्रदेश के हर परिवार और व्यक्ति को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी मिल रही है। आम लोगों को तेज, पारदर्शी और आसान सेवाएं मिल रही हैं और शासन-प्रशासन अधिक जवाबदेह बन रहा है।
डिजिटल प्लेटफार्म के विस्तार से तेजी

उन्होंने कहा, तीन वर्ष में डिजिटल प्लेटफार्म के विस्तार से सरकारी कामकाज में तेजी आई है और पारदर्शिता बढ़ी है। आने वाले समय में डाटा आधारित फैसलों, साइबर सुरक्षा और विभिन्न सेवाओं के एकीकरण पर विशेष ध्यान रहेगा। हिमकेयर योजना को भी डाटा और पोर्टल से जोड़ा है, ताकि केवल पात्र लोगों को ही इसका लाभ मिल सके।
71 प्रतिशत शिकायतों की संतोषजनक समाधान

गोकुल ने कहा कि तकनीक के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा और विभिन्न सरकारी सेवाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए अलग-अलग पोर्टल और एप के जरिए विभागों को सशक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन (1100) के तहत वर्तमान में 71 प्रतिशत शिकायतों की संतोषजनक समाधान दर हासिल की है, जो देश में सबसे अधिक है।

सबसे अधिक शिकायतें पानी की अनियमित आपूर्ति और गैर आपूर्ति की 1,95,893 है। प्रदेश में 79.69 लाख से अधिक आधार कार्ड जारी किए गए हैं, जो अनुमानित जनसंख्या के 114.34 प्रतिशत को सफलतापूर्वक कवर करते हैं।

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