लैपटाप महंगा, एक माह में कीमतों में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि, स्मार्ट फोन के रेट में भी बढ़ोतरी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/Laptop-and-Smartphone-Price-Hike-1771064019150_m.webpप्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित लैपटाप के शोरूम में खरीदारों की भीड़। जागरण
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग का असर अब आम उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। एआइ आधारित एप्लीकेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग, डाटा प्रोसेसिंग और हाई-परफार्मेंस सिस्टम की मांग बढ़ने से हार्डवेयर उपकरणों की खपत में जबरदस्त उछाल आया है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ है कि लैपटाप, स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
पिछले एक माह के भीतर लैपटाप की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि स्मार्टफोन के दाम भी 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। जो लैपटाप एक माह पहले 35 से 40 हजार रुपये में उपलब्ध थे, उनकी कीमत अब 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंच गई है। इसी प्रकार 23 से 25 हजार रुपये में मिलने वाले स्मार्टफोन अब 26 से 28 हजार रुपये के बीच बिक रहे हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि एआइ आधारित टूल्स, मशीन लर्निंग, डाटा एनालिटिक्स और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग की मांग में तेज उछाल आया है। बड़ी आइटी कंपनियां, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थान और यहां तक कि छोटे व्यवसाय भी एआइ को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
बताया कि एआइ एप्लीकेशन को सुचारु रूप से चलाने के लिए उच्च क्षमता वाले प्रोसेसर, अधिक रैम, एडवांस ग्राफिक्स कार्ड और तेज स्टोरेज की आवश्यकता होती है। इससे हार्डवेयर कंपनियों पर उत्पादन बढ़ाने का दबाव बना है। मांग के मुकाबले आपूर्ति सीमित होने से कीमतों में स्वाभाविक रूप से बढ़ोतरी हो रही है।
छात्रों पर सबसे ज्यादा असर
लैपटाप की कीमतों में 30 प्रतिशत तक हुई वृद्धि का सबसे अधिक असर छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों पर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति और डिजिटल शिक्षा के विस्तार के बाद पढ़ाई के लिए लैपटाप की आवश्यकता लगभग अनिवार्य हो चुकी है। कालेजों और प्रोफेशनल कोर्स में पढ़ाई कर रहे छात्रों को प्रोजेक्ट, प्रेजेंटेशन, कोडिंग और आनलाइन कक्षाओं के लिए लैपटाप की जरूरत होती है। पहले जो परिवार 35-40 हजार रुपये में एक अच्छा लैपटाप खरीद लेते थे, अब उन्हें उसी स्तर के डिवाइस के लिए 50-60 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
क्या कहते हैं कारोबारी व लोग?
उच्च कांफिगरेशन वाले लैपटाप, जिनमें एआइ सपोर्टेड चिपसेट और ग्राफिक्स कार्ड लगे हैं, उनकी मांग सबसे अधिक है। यही कारण है कि मिड-रेंज से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक सभी श्रेणियों में दाम बढ़े हैं। आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
- शिवशंकर सिंह, सचिव, उप्र कंप्यूटर एसोसिएशन व एमएसएमई के मार्गदर्शक।
महंगाई ने पहले से ही परेशान कर रखा है। स्कूल, कोचिंग फीस, किताबें और अन्य खर्चों के बीच लैपटाप की बढ़ी कीमत अतिरिक्त बोझ बन गई है। ऐसे में हर हाल में कीमतें कम होनी चाहिए।
- रिशू मिश्रा।
तकनीक आज जरूरत बन चुकी है। ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। लोगों को अपने बच्चों के लिए लैपटाप खरीदना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
- नीरू खन्ना।
आनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, पढ़ाई, नौकरी, फ्रीलांसिंग और मनोरंजन हर क्षेत्र में स्मार्टफोन और लैपटाप की आवश्यकता है। कीमतें बढ़ने से यह आम आदमी की पहुंच से दूर हो गया है।
- तनु अग्रवाल।
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