cy520520 Publish time 2026-2-14 15:56:47

मंडी शिवरात्रि: आराध्य देव कमरुनाग के छोटी काशी पहुंचते ही महोत्सव के कारज शुरू, निभाई वर्षों पुरानी परंपरा

जागरण संवाददाता, मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की सुगबुगाहट के साथ ही छोटी काशी मंडी देवी-देवताओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हो गई है। शनिवार को जनपद के सबसे शक्तिशाली और आराध्य देव बड़ा देव कमरुनाग अपने लाव-लश्कर और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के साथ मंडी शहर पहुंचे।

उनके आगमन के साथ ही समूचा शहर भक्ति के रंग में सराबोर हो गया और महाशिवरात्रि महोत्सव के औपचारिक कारज (कार्य) विधिवत रूप से आरंभ हो गए हैं। मंडी शिवरात्रि महोत्सव रविवार से शुरू होगा। यह महोत्सव 128 वर्ष से मनाया जा रहा है।

देव कमरुनाग का सर्व देवता सेवा समिति ने शहर के प्रवेश द्वार पुलघराट में भव्य स्वागत किया। जैसे ही देवता का रथ शहर की सीमा में दाखिल हुआ, ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की गूंज से आसमान गुंजायमान हो गया। यहां से देवता का कारवां मुख्य बाजार की ओर बढ़ा। सड़क के दोनों ओर खड़े हजारों श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य पर पुष्प वर्षा की।
परंपरा का निर्वहन किया

परंपरा का निर्वहन करते हुए बड़ा देव कमरुनाग सबसे पहले मंडी के राजदेवता माधोराय के मंदिर पहुंचे। यहां उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने देवता का भव्य सत्कार किया और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात देव कमरुनाग का सूरज पंख मोहरा राजमहल (पैलेस) पहुंचा।

राजमहल में हाजिरी भरने की यह परंपरा रियासत काल से अनवरत चली आ रही है। यहां राज परिवार के सदस्यों ने देवता का अभिनंदन किया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।
शहर की सबसे ऊंची पहाड़ी पर विराजमान हुए देव

राजमहल के प्रांगण में कुछ देर विश्राम करने के बाद बड़ा देव कमरुनाग का मोहरा शहर की सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित टारना माता मंदिर के लिए प्रस्थान कर गया। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, महोत्सव की पूरी अवधि के दौरान देव कमरुनाग टारना की पहाड़ी पर ही विराजमान रहते हैं और वहीं से पूरे महोत्सव की गतिविधियों पर अपनी दिव्य दृष्टि रखते हैं।
शहर के चप्पे-चप्पे पर भक्तों का हुजूम

बड़ा देव के आगमन की सूचना मिलते ही शहर के चप्पे-चप्पे पर भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते दिखे। कई श्रद्धालु तो मीलों पैदल चलकर देव दर्शन के लिए पहुंचे थे। देव कमरुनाग के आगमन के साथ ही अब अन्य देवी-देवताओं के मंडी पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में छोटी काशी पूरी तरह देवलोक में परिवर्तित हो जाएगी।

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