झारखंड में सड़क के अभाव में रास्ते में ही बनी अर्थी, शव को कंधे पर रखकर 10 किलोमीटर दूर पैदल पहुंचाया घर
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/gumla-1771077767045_m.webp10 किमी तक शव को कंधे पर ढोया शव
संवाद सहयोगी, गुमला। रायडीह प्रखंड के लालमट्टी गांव निवासी 48 वर्षीय भिनसाई मुंडा की शनिवार को सदर अस्पताल, गुमला में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के बाद परिवार का दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। परिजन शव को निजी वाहन से कासीर मुख्य पथ तक तो ले आए, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण वाहन आगे नहीं बढ़ सका।
मजबूरन, लालमट्टी मार्ग पर ही अर्थी तैयार हुई और करीब 10 किलोमीटर तक शव को कंधों पर उठाकर पहाड़ों के बीच बसे गांव तक ले जाना पड़ा।ग्रामीण बताते हैं कि लालमट्टी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
बीमारी और मौत भी लेती है परीक्षा
पक्का रास्ता न होने से रोजमर्रा की जिंदगी ही नहीं, बल्कि बीमारी और मौत भी यहां लोगों की परीक्षा लेती है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट या अस्थायी साधनों का सहारा लेना पड़ता है। किसी की सांस अटकती है, तो उम्मीद भी रास्ते में अटक जाती है।
यह पहली बार नहीं है। 20 अगस्त 2025 को गांव की सुनीता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर बहंगी के सहारे मुख्य सड़क तक लाया गया। काफी देर बाद 108 एंबुलेंस मिली, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में बच्चे का जन्म हो गया।ग्रामीणों का दर्द सीधा सवाल बनकर खड़ा हैजब सड़क नहीं, तो विकास कैसा।
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