LHC0088 Publish time 2026-2-14 19:57:01

सीसीटीवी और एफआरएस की मदद से खुला चोरी का राज, दिल्ली पुलिस ने रिसीवर सहित दो दबोचे; लाखों के गहने बरामद

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पुलिस ने आरोपितों की फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) से पहचान करने के बाद दबोचा। प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मध्य जिले के डीबीजी रोड थाना पुलिस की टीम ने बंद घरों के ताले तोड़ सोने व चांदी के आभूषण चाेरी करने वाले गिरोह के रिसीवर समेत दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपितों की फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) से पहचान करने के बाद दबोचा।

इनकी पहचान न्यू सीलमपुर के अब्दुल नफीस उर्फ नफीस और मौजपुर के मनोज कुमार वर्मा के रूप में हुई है। इनके कब्जे से लाखों की कीमत के सोने व चांदी के आभूषण बरामद हुए हैं। पुलिस इनसे पूछताछ कर इनके तीसरे साथी की तलाश में जुटी है।
करनाल गया था परिवार

उपायुक्त अनंत मित्तल के मुताबिक, 18 जनवरी को थाना डीबीजी रोड पर एक घर में चोरी की जानकारी मिली। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ डोरीवालान, करोल बाग में रहता है और टूर एंड ट्रैवल का बिजनेस करता है। 17 जनवरी की सुबह करीब 11:30 बजे वह परिवार सहित एक फंक्शन के लिए हरियाणा के करनाल गए थे।
सात दिनों तक लगातार रिकार्डिंग जांची

अगले दिन जब वे लौटे, तो घर का मेन गेट खुला हुआ था और अलमारी पांच तोले की चार सोने की चूड़ियां, चार तोले की पांच सोने की अंगूठियां, ढाई तोले का सोने का कंगन, तीन तोले की दो सोने की चेन, एक जोड़ी हीरे के टाप्स, 18 चांदी के सिक्के और 1.5 लाख नकद चोरी हो गए थे।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान, टीम ने आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले और लगभग सात दिनों तक लगातार रिकार्डिंग की आगे-पीछे की जांच के बाद, संदिग्ध चांदनी चौक, पुराने रेलवे स्टेशन के पास कैमरे में कैद हो गया।
कब्जे से चोरी के आभूषण बरामद

इसके बाद एफआरएस की मदद से, संदिग्ध की पहचान अब्दुल नफीस उर्फ नफीस के रूप में हुई। इसके बाद नौ फरवरी को मुखबिरों से मिली जानकारी के बाद आरोपित को न्यू सीलमपुर इलाके से दबोच लिया गया।

पूछताछ में आरोपित ने बताया कि उसने सह आरोपित नसीम के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था और सभी आभूषण रिसीवर मनोज कुमार को बेच दिए थे। उसकी निशानदेही पर दस फरवरी को आरोपित मनोज कुमार को गिरफ्तार करते हुए उसके कब्जे से चोरी के आभूषण बरामद किए।
एफआरएस से कैसे होती है आरोपितों की पहचान

फेस रिकग्निशन तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित होती है। सिस्टम पहले तस्वीर या कैमरे में चेहरे की पहचान करता है। फिर आंखों, नाक और जबड़े जैसे खास बिंदुओं का विश्लेषण कर उन्हें डिजिटल कोड यानी फेसप्रिंट में बदल देता है। यह कोड डाटाबेस से मिलाया जाता है। मेल होने पर पहचान सुनिश्चित होती है, अन्यथा व्यक्ति को अनजान माना जाता है।

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