अनोखी खगोलीय घटना: सूर्य ने ही खत्म किया धूमकेतु को, अब बचा हिस्सा लगा रहा है सूरज का चक्कर
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/comet-orbiting-the-sun-1771091827662_m.webpसी 2019वाई एटलस नामक धूमकेतु के टुकड़ों का चित्र। सौजन्य इंटरनेट
रमेश चंद्रा, नैनीताल। अंतरिक्ष की दुनिया अजूबी है और इसके नियम भी। सूर्य की भीषण गर्मी से टूटकर बिखर चुका एक धूमकेतु का बचा हुआ टुकड़ा अब सूर्य की परिक्रमा कर रहा है। वर्ष 2020 में कोविड लौक डाउन के दौरान यह सुर्खियों में आया था। सी 2019वाई एटलस इस धूमकेतु इसका नाम है।
हमारे सौर मंडल के अंतिम छोर के सदस्य धूमकेतुओं की दुनिया वास्तव में निराली है। बर्फ की मोटी खाल से ढके रहने वाले धूमकेतुओं की नियमित दिनचर्या है, जो अरबों खरबों मील की यात्रा कर सूर्य के करीब पहुंचते हैं और सूर्य की परिक्रमा कर वापस लौट जाते हैं।
इनमें कई धूमकेतु आत्मघाती भी होते हैं, जो सीधा सूर्य की लपटों में समाकर खत्म हो जाते हैं। अब जिस धूमकेतु की खबर आ रही है, अप्रैल 2020 में सूर्य के इतने करीब पहुंच गया कि सूर्य की गर्मी से झुलसने के कारण टूटकर 30 से भी अधिक टुकड़ों में छिन्न भिन्न हो गया और इसकी बर्फ पूरी तरह पिघल गई थी ।
जिसके बाद वैज्ञानिकों इसे मृत घोषित कर दिया था। सूर्य की लपटों में टकराने से पहले माना जा रहा था कि यह जबरदस्त चमक बिखेरेगा और इतिहास में नाम दर्ज कर जाएगा।
जिस कारण यह वैज्ञानिकों के बीच सुर्खियों में बना हुआ था। मगर यह सूर्य के इतने नजदीक जा पहुंचा कि कई टुकड़ों में बंट गया।
मगर अब खबर आई है कि इस धूमकेतु का एक बड़ा हिस्सा सूर्य की आग में झुलसने के बाद बच निकला और इसकी जांच पड़ताल करने के बाद पता चला है कि बचा हुआ टुकड़ा सूर्य की परिक्रमा कर रहा है।
इसे कोरोना लॉकडाउन का धूमकेतु भी कहा जाता है। बोस्टन यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों के अध्ययन के बाद मिली जानकारी के अनुसार इस धूमकेतु की गैस उड़ चुकी है और बर्फ पूरी तरह पिघल चुकी है। इसके आधा किमी का हिस्सा अभी बचा हुआ है, जो सूर्य की परिक्रमा कर रहा है।
खत्म होने के बाद की जानकारी देगा यह धूमकेतु
नैनीताल। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ खगोल विज्ञानी डा शशिभूषण पांडेय का कहना है कि धूमकेतुओं के खत्म होने के बाद का रहस्य अभी भी बरकरार है। जिस कारण सी 2019वाई एटलस के बचा हुआ टुकड़ा कई नई जानकारियां दे जाएगा।
धूमकेतु हमारे सौर मंडल के महत्वपूर्ण सदस्य हैं, जिनके बारे में पूरी जानकारी मिलनी बाकी है। जिसके चलते बचे हुए धूमकेतू के टुकड़े का महत्व बढ़ जाता है।
यह भी पढ़ें- 17 फरवरी को लगेगा साल का पहला सूर्यग्रहण, क्या भारत में दिखेगा? ये रहेगी टाइमिंग
यह भी पढ़ें- फरवरी में तीन खगोलीय घटनाओं का अद्भुत संगम: धूमकेतु, सनस्पाट और ग्रहों का मिलन
Pages:
[1]