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उत्तराखंड के हजारों कर्मियों को तीन माह से नहीं मिली सैलरी, किसी के बच्चों को स्कूल से निकाला तो कहीं टूटी सगाई

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उत्तराखंड परिवहन निगम में तीन महीने से नहीं मिला वेतन। प्रतीकात्मक



अंकुर अग्रवाल, देहरादून । उत्तराखंड परिवहन निगम के करीब पांच हजार कर्मचारियों के लिए तीन महीने से वेतन न मिलना अब सिर्फ आर्थिक संकट नहीं, बल्कि सामाजिक व पारिवारिक टूटन बन चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि एक परिचालक के बच्चे को फीस न भरने पर स्कूल से बाहर कर दिया गया और एक चालक का रिश्ता तक टूट गया। क्योंकि लड़की वालों ने कह दिया कि \“नौकरी है, लेकिन कमाई नहीं…, ऐसे में भविष्य कैसे चलेगा?\“

अब यह सिर्फ वेतन का मामला नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों और बिखरते परिवारों का दर्द बन चुका है। कर्मचारी कह रहे है कि \“हम बसें चला रहे हैं, सेवा दे रहे हैं, लेकिन हमारे अपने घर में चूल्हा तक बुझने की कगार पर हैं।\“

इस त्रासदी की सबसे मार्मिक कहानी काशीपुर डिपो के उस परिचालक की है, जिसका 10 वर्षीय बेटा पिछले दिनों स्कूल से रोते हुए घर लौटा। स्कूल प्रशासन ने साफ शब्दों में कह दिया कि \“जब तक फीस नहीं आती, बच्चा क्लास में नहीं बैठेगा।\“ घर का राशन पहले ही उधार में चल रहा था। ऐसे में हजारों की फीस भरना उसके बस से बाहर था।

पिता बेबस होकर कहते हैं कि \“हमारी नौकरी ने तो बच्चे को पढ़ाई से दूर भेज दिया…, यह तो हमारी दुनिया उजड़ने जैसा है।\“ दूसरी ओर, एक चालक जिसकी

सगाई छह महीने पहले तय हुई थी, अब टूट चुकी है। लड़की वालों ने स्पष्ट कह दिया कि तीन-तीन महीने तक वेतन न आने वाली नौकरी में बेटी का भविष्य असुरक्षित है। चालक ने टूटे दिल से बताया कि \“मेरे हाथ में कुछ नहीं था… नौकरी है, पर जेब खाली है। रिश्ते भी अब कमाई पर टिकते हैं।\“

ऐसे एक-दो नहीं सैकड़ों कर्मचारियों के परिवार हैं, जिनके साथ अब घरों में रोजमर्रा की जद्दोजहद भी चरम पर पहुंच चुकी है। दूधवाले ने उधार देना बंद कर दिया, किराना दुकानदार ने कह दिया है कि पहले पुराना हिसाब चुकाओ। कई घरों में गैस खत्म है, लेकिन रिफिल के पैसे नहीं। किराये पर रहने वालों की स्थिति सबसे दयनीय है। मकान मालिक हर दूसरे दिन दरवाजा खटखटा रहे हैं कि किराया दो, नहीं तो घर खाली कर दो। ऊपर से बीमार माता-पिता की दवाएं, बच्चों की कापी-किताबें, रोजमर्रा का खर्च, सबकुछ ठप।
कर्मचारियों का दर्द इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित

परिवहन निगम के कर्मचारियों का यह दर्द शनिवार को इंटरनेट मीडिया पर उस समय प्रसारित हुआ, जब काशीपुर डिपो के एक चालक ने उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महामंत्री अशोक चौधरी को फोन कर आपबीती सुनाई। चालक के साथ कुछ अन्य कर्मचारियों ने भी वेतन न मिलने के कारण परिवार का आर्थिक संकट बयां किया।

महामंत्री चौधरी ने यह आडियो क्लिप निगम के उच्चाधिकारियों को भेजकर जानकारी दी कि अगर कर्मचारियों का यही हाल रहा तो बस संचालन ठप होने में देर नहीं लगेगी। कर्मचारियों का सब्र अब उबल चुका है। वे साफ कहते हैं कि वेतन नहीं आया, तो अगली बार सड़कों पर उतरेंगे, क्योंकि अब बात पेट और बच्चों के भविष्य की है। वहीं, इस मामले में जब निगम के महाप्रबंधक क्रांति सिंह से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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