सेना से दबंगई: मुजफ्फरपुर में रक्षा मंत्रालय की 9.36 एकड़ पर अतिक्रमण, अन्य जिलों में भी बुरा हाल
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/15/article/image/Land-1771155401222_m.webpBihar Land Dispute: मुजफ्फरपुर में रक्षा मंत्रालय की जमीन पर राज्य सरकार व सिविलियन दोनों का कब्जा है। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Army Land Encroachment: राज्य के छह जिलों में सेना की करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमण के मामले को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल के निर्देश के बाद वर्षों से दबी फाइलें अब खुलने लगी हैं। प्रशासन को इन मामलों के निष्पादन के लिए 31 मार्च तक की डेडलाइन दी गई है।
उपलब्ध डाटा के अनुसार बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में रक्षा मंत्रालय की 9.36 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है। इसमें 4.48 एकड़ जमीन पर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों का कब्जा है, जबकि 4.88 एकड़ भूमि पर सिविलियन द्वारा कब्जा किया गया है। विभाग की ओर से अतिक्रमणकारी सिविलियन की सूची पहले ही जारी की जा चुकी थी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि रक्षा मंत्रालय की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ-साथ राजस्व अभिलेखों में उसका स्पष्ट विवरण दर्ज किया जाए। साथ ही सभी संबंधित भूखंडों का दाखिल-खारिज रक्षा मंत्रालय के नाम से सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति न बने।
पांच मार्च से विधिवत नोटिस की कार्रवाई
प्रधान सचिव ने मुजफ्फरपुर सहित पटना, रोहतास, कैमूर, गया और गोपालगंज के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि पांच मार्च के बाद अतिक्रमणकारियों को विधिवत नोटिस जारी किया जाए। इसके बाद अमीन से भूमि की मापी कराते हुए रक्षा भूमि को पिलर लगाकर चिह्नित किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का खर्च रक्षा मंत्रालय द्वारा वहन किया जाएगा।
अन्य जिलों में भी गंभीर स्थिति
रिकॉर्ड के अनुसार गया जिले में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को 344.39 एकड़ सेना की भूमि सौंपे जाने का स्पष्ट अभिलेख उपलब्ध नहीं है। दानापुर कैंट क्षेत्र में बीएसएनएल, मनेर में पीडब्ल्यूडी व अन्य विभागों, जबकि नौसा और हथुआ जैसे क्षेत्रों में भी विभिन्न सरकारी एवं निजी संस्थाओं द्वारा सेना की जमीन पर कब्जा बताया गया है।
राजस्व विभाग का मानना है कि गलत म्यूटेशन के कारण अतिक्रमण और अनावश्यक मुकदमेबाजी बढ़ी है। अब तय समय-सीमा में कार्रवाई कर रक्षा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी की जा रही है।
Pages:
[1]