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हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में मिलेगा बेहतर उपचार, सुक्खू सरकार ने आधुनिक सेवाओं के लिए 1617 करोड़ किए स्वीकृत

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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव



जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में सुलभ और उच्च गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा निवेश करते हुए तीन हजार करोड़ रुपये की व्यापक स्वास्थ्य आधुनिकीकरण पहल के प्रथम चरण में 1,617 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 1 अप्रैल, 2026 से 30 अप्रैल, 2031 तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों, सुपर स्पेशियलिटी केंद्रों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के बुनियादी ढांचे को अत्याधुनिक बनाना है, ताकि मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिल सके और उन्हें प्रदेश से बाहर जाने की मजबूरी कम हो। देर से जांच और इलाज होने पर न केवल बीमारी गंभीर हो जाती है, बल्कि चिकित्सा व्यय भी 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म से लैस

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस पहल के तहत संस्थानों को अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं, सिमुलेशन आधारित मेडिकल प्रशिक्षण प्रणाली, एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरण तथा एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म से लैस किया जाएगा। इससे विशेषज्ञ उपचार तक समयबद्ध पहुंच, रेफरल लागत में कमी और दूरदराज क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
उन्नत जांच उपकरण लगाए जाएंगे

एमआरआई, सीटी स्कैनर, डिजिटल रेडियोलॉजी सिस्टम और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक लैब जैसे उन्नत जांच उपकरण भी लगाए जाएंगे। पीएसीएस, एलआईएमएस, टेलीमेडिसिन और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम को एबीडीएम मानकों के अनुरूप एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
आईजीएमसी और चमियाणा में मजबूत होंगे उपचार केंद्र

दूसरे चरण में आईजीएमसी शिमला, एआईएमएसएस चमियाणा और डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में तृतीयक उपचार सेवाओं को और सुदृढ़ किया जाएगा। यहां रीनल व बोन मैरो ट्रांसप्लांट, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, उन्नत एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं, बाल चिकित्सा सेवाएं और रोबोटिक सर्जरी का विस्तार किया जाएगा। संस्थानों को ओ-आर्म 3डी इमेजिंग, न्यूरो-नेविगेशन सिस्टम, रोबोटिक सर्जरी प्लेटफॉर्म और इंटीग्रेटेड क्रिटिकल केयर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। इसके अलावा एक उन्नत बाल चिकित्सा देखभाल एवं नवाचार केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।
जिला अस्पतालों को भी मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

तीसरे चरण में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों को सीटी स्कैनर, मोबाइल एक्स-रे यूनिट, अल्ट्रासाउंड मशीन, लैप्रोस्कोपिक सिस्टम और नेत्र शल्य चिकित्सा इकाइयों जैसी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। टेलीमेडिसिन सेवाओं और डिजिटल रेफरल नेटवर्क का विस्तार कर जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी केंद्रों से जोड़ा जाएगा, जिससे दुर्गम क्षेत्रों के मरीजों को भी विशेषज्ञ उपचार आसानी से मिल सकेगा।
बाहर इलाज को जाने वाले मरीजों पर लगेगी रोक

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर साल करीब 9.5 लाख मरीज इलाज के लिए हिमाचल से बाहर जाते हैं, जिससे राज्य की जीडीपी को लगभग 1,350 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। यदि प्रदेश में ही उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो जाएं तो प्रतिवर्ष करीब 550 करोड़ रुपये की जीडीपी बचत संभव है और मरीजों का समय व खर्च दोनों कम होंगे।

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