Chikheang Publish time 2026-2-15 17:56:40

लखीमपुर में हाथियों के झुंड ने 4 एकड़ गेहूं की फसल रौंदी, रोज अलग-अलग गांवों में मचा रहे तबाही

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संवादसूत्र, पलियाकलां (लखीमपुर)। मझगई रेंज में हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। हाथियों ने अब जंगल से निकल कर खेतों में आने का समय बदल दिया है जिससे उनकी निगरानी करना मुश्किल हो रहा है। बीती रात हाथियों ने बुद्धापुरवा गांव में दोबारा धावा बोला और करीब चार एकड़ फसल को रौंद कर नष्ट कर दिया।

मझगई रेंज में ग्रामीणों ने वनकर्मियों के साथ संगठित होकर हाथियों को भगाने का अभियान चलाया तो हाथियों के झुंड ने प्रतिदिन अलग अलग गांवों में घुसना शुरू कर दिया। इससे अब सभी गांवों के ग्रामीणों की व्यस्तता और वनकर्मियों की दिक्कत बढ़ गई। इसके बाद भी ग्रामीणों ने हाथियों को खदेडऩे का क्रम जारी रखा तो अब हाथियों ने खेतों में घुसने का समय बदल दिया है।

दो बजे तक ही खेतों में रह पाते हैं

अमूमन ग्रामीण व वनकर्मी रात एक से दो बजे तक ही खेतों में रह पाते हैं। इसके बाद ठंड बढ़ते व नींद के कारण वे लोग वापस आ जाते हैं। अभी तक रात एक से दो बजे तक जब हाथी खेतों में घुसते थे तो उन्हें प्रतिरोध का सामना करना पड़ता था। अब हाथियों ने खेतों में घुसने का समय बदल दिया है। इधर हाथियों का झुंड रात ढ़ाई बजे के बाद खेतों में पहुंचता है।

इससे उन्हें अब प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ रहा है फलस्वरूप हाथी मनमाने तरीके से फसलों को तहस नहस कर रहे हैं। बीती रात भी हाथी करीब ढ़ाई बजे बुद्धापुरवा गांव में पहुंचे थे। उस समय न तो ग्रामीण और न ही वनकर्मी वहां मौजूद थे जिससे हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया और करीब चार एकड़ गेंहू की फसल को रौंद दिया।

फसल देख दंग रह गए किसान

सुबह जब ग्रामीणों ने फसल की बर्बादी देखी तो उनके होश उड़ गए। ग्रामीणों ने वनकर्मियों पर हाथियों को नियंत्रित करने में बिफल रहने का आरोप लगाते हुए उन्हें घेर लिया और हाथियों को जंगल में खदेड़ने पर जोर दिया। उनका कहना था कि बड़ी मुश्किल से फसल बोई गई थी जो हाथी नष्ट कर दे रहे हैं। इस बात को लेकर ग्रामीणों न वनकर्मियों के मध्य कहासुनी भी हुई।

वनकर्मियों का कहना था कि वे रात दिन मेहनत कर रहे हैं फिर भी हाथी हार नहीं मान रहे हैं तो उसमें उनकी क्या गलती है। रेंजर मझगई अंकिंत कुमार सिंह ने बताया कि हाथी अब स्मार्ट व्यवहार कर रहे हैं।

उन्हें भगाने के लिए जो रणनीति अपनाई जाती है हाथी उससे अलग व्यवहार करके ग्रामीणों व वनकर्मियों को छका रहे हैं। हपले हाथियों ने प्रतिदिन अलग अलग गांव में जाने लगे और अब समय में बदलाव कर रात ढाई बजे खेतों में घुस रहे हैं। हाथियों के व्यवहार में यह परिवर्तन नोटिस करने वाला है।
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