Chikheang Publish time 2026-2-16 15:26:43

फरवरी में बढ़ता तापमान बना चिंता; गेहूं बचाने को किसान कर रहे सिंचाई, पोटेशियम नाईट्रेट स्प्रे की सिफारिश

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सिंचाई के लिए छोड़ा गया पानी।



नवदीप सिंह, संगरूर। फरवरी का अभी आधा माह ही गुजरा है, लेकिन तापमान मार्च माह की भांति बढ़ रहा है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण जनजीवन ही नहीं बल्कि फसलों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना काफी बढ़ गई है। किसानों को चिंता है कि बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल की पैदावार कम न हो जाए, क्योंकि गेहूं की फसल को बढ़ने और पकने के लिए अभी भी ठंडी जलवायु की आवश्यकता है।

पिछले दो वर्ष पहले मार्च में असामान्य रूप से गर्मी पड़ने के कारण पैदावार बहुत कम हुई थी। अब फरवरी में ही मौसम काफी गर्म होता जा रहा है। सोमवार दोपहर को संगरूर का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रहा। नजदीकी गांव बडरूखां के किसान लीला सिंह, शिंगारा सिंह, जीत सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल को तीन पानी की सिंचाई की जा चुकी है।

मौजूदा समय में तापमान के कारण सिंचाई जल्द करनी पड़ रही है। रात व दिन का तापमान मिलाकर औसत 22 डिग्री सेल्सियस गेहूं की पैदावार के लिए सबसे उत्तम माना गया है। औसत तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक को फसल सहन कर सकती है, पर दिन का तापमान अधिक बढ़ने पर गेहूं के बनने वाले दानों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

सोमवार को अधिक तापमान 26 डिग्री रहा। किसानों ने कहा कि मौजूदा समय दिन व रात के तापमान में करीब 15 व 16 डिग्री का अंतर आ रहा है। दिन गर्म व रात में मौसम ठंडा रहता है। इसके साथ ही किसानों ने अपने खेतों में करेला, ककड़ी, पेठा, खीरा इत्यादि उगा रखी हैं। गर्मी से सब्जी के आ रहे फूल झड़ सकते हैं। फसल कम हो सकती है।

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किसानों को पैदावार घटने का डर

किसान गमदूर सिंह व सुखदेव सिंह के मुताबिक इस समय गेहूं डंडी का रूप लेने लगी है, फसल पर गेहूं के छींटे भी आने लगे हैं। इसलिए यह समय गेहूं के लिए खास है, क्योंकि अनाज के दाने दूध जैसे पदार्थ से भरे होते हैं, जो बाद में ठोस होकर गेहूं का आकार लेंगे, अगर तापमान बढ़ता रहा तो दूध सूखने से दाना पिचक जाएगा, जिससे पैदावार कम होगी।

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कृषि विभाग ने की सिफारिश

कृषि विभाग के कर्मचारियों द्वारा किसानों को अधिक तापमान के चलते गेहूं पर पोटेशियम नाईट्रेट के स्प्रे की सिफारिश की गई है। इससे तापमान का असर पौधे पर कम होता है, फलस्वरूप पौधे की ग्रोथ अच्छी और मजबूत होती है। इसके अलावा किसानों को समय-समय पर खेतों का दौरा करते हुए कृषि माहिरों की सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि समय रहते उचित हल किया जा सके।

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