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आप भी झगड़े के बाद कर देते हैं पार्टनर से बात बंद? कैसे रिश्ते को खोखला कर सकता है साइलेंट ट्रीटमेंट

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रिश्ते को कमजोर करता है साइलेंट ट्रीटमेंट (Picture Courtesy: Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कई रिश्तों में झगड़े होना आम बात है। कभी बातों से, तो कभी गलतफहमी से टकराव हो ही जाता है। लेकिन झगड़े के बाद अगर आप अपने पार्टनर से बात करना बंद कर देते हैं, मैसेज का जवाब नहीं देते या जानबूझकर चुप्पी साध लेते हैं, तो इसे साइलेंट ट्रीटमेंट कहा जाता है।

पहली नजर में यह तरीका आसान लग सकता है, ना बहस, ना सफाई, लेकिन असल में यह रिश्ते के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। आइए जानें कैसे साइलेंट ट्रीटमेंट आपके रिश्ते को प्रभावित कर सकता है।
साइलेंट ट्रीटमेंट आखिर होता क्या है?

साइलेंट ट्रीटमेंट का मतलब है, किसी नाराजगी या गुस्से के बाद पार्टनर से जानबूझकर दूरी बना लेना। इसमें सामने वाले को यह तक नहीं बताया जाता कि गलती क्या है या समस्या कहां है। कई लोग इसे खुद को शांत करने का तरीका मानते हैं, लेकिन जब यह आदत बन जाए, तो रिश्ता धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।

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(Picture Courtesy: Freepik)
क्यों लोग चुप्पी को हथियार बना लेते हैं?

अक्सर लोग इसलिए चुप हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि बात करने से झगड़ा और बढ़ जाएगा। कुछ लोग टकराव से डरते हैं, तो कुछ यह मानते हैं कि सामने वाला खुद ही समझ जाएगा। कई बार साइलेंट ट्रीटमेंट को सजा देने के तरीके की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पार्टनर को अपनी गलती का एहसास हो।
रिश्ते पर कैसे पड़ता है इसका असर?

लगातार साइलेंट ट्रीटमेंट देने से पार्टनर खुद को नजरअंदाज किया हुआ महसूस करने लगता है। उसे यह समझ नहीं आता कि गलती क्या हुई और सुधार कैसे किया जाए। इससे धीरे-धीरे रिश्ते में असुरक्षा, दूरी और थकान बढ़ती है। चुप्पी बात-चीत का विकल्प नहीं होती, बल्कि यह समस्याओं को दबाने का तरीका बन जाती है, जो समय के साथ और गंभीर रूप ले लेती हैं।

जब कोई बार-बार चुप्पी का सहारा लेता है, तो सामने वाले के आत्मसम्मान को नुकसान पहुंचता है। उसे लगने लगता है कि उसकी भावनाओं की कोई अहमियत नहीं है। यह स्थिति रिश्ते में बैलेंस को भी बिगाड़ सकती है, जहां एक पार्टनर खुद को कमजोर और दूसरा खुद को कंट्रोल में महसूस करता है।

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क्या हर चुप्पी गलत होती है?

हर तरह की चुप्पी साइलेंट ट्रीटमेंट नहीं होती। कभी-कभी गुस्से में खुद को संभालने के लिए थोड़ी देर का स्पेस लेना जरूरी होता है। फर्क बस इतना है कि उस स्पेस के बारे में पार्टनर को बताया जाए कि मुझे थोड़ा स्पेस चाहिए। इससे आपके पार्टनर को समझ आएगा कि आपको स्पेस की जरूरत है और वह खुद को अनदेखा किया हुआ नहीं समझेगा।
इस आदत से कैसे बाहर निकलें?

अगर आपको एहसास हो रहा है कि आप झगड़े के बाद चुप्पी साध लेते हैं, तो सबसे पहले अपनी भावनाओं को पहचानें। गुस्से या दुख को शब्दों में कहना सीखें। बातचीत के लिए सही समय चुनें, लेकिन बातचीत से भागें नहीं। पार्टनर को यह बताना कि आपको क्या तकलीफ हुई, रिश्ते को मजबूत बनाता है, न कि कमजोर।
बात-चीत से मजबूत होता है रिश्ता

हर रिश्ता गलतफहमियों से गुजरता है, लेकिन बातचीत से मनमुटाव को सुलझाया जा सकता है। साइलेंट ट्रीटमेंट पलभर की राहत दे सकता है, लेकिन लंबे समय में यह रिश्ते को अंदर से खोखला कर देता है।
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