Chikheang Publish time 2026-2-16 16:26:43

एब्डोमिनल ओबेसिटी में पंजाब दूसरे स्थान पर; बदलती जीवनशैली का असर, राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा स्वास्थ्य संकट

https://www.jagranimages.com/images/2026/02/16/article/image/obesity-crysis-1771240118918_m.webp

भारत में राज्य दूसरे स्थान पर है।



रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से लोकसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की 57.2 फीसदी आबादी एब्डामिनल ओबेसिटी यानी पेट की चर्बी से जूझ रही है। यह आंकड़ा पंजाब को पूरे देश में इस समस्या के मामले में दूसरे स्थान पर ले आता है।

पहले नंबर पर केरल है, जहां 58.2 फीसदी लोग इस बीमारी की चपेट में हैं, जबकि हरियाणा 56.9 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है। चिंताजनक बात यह है कि पंजाब का यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 39.5 फीसदी से कहीं ज्यादा है, जो राज्य के लिए बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का संकेत देता है।

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सरकारी योजनाएं काफी नहीं होंगी, जब तक लोग खुद अपनी जीवनशैली नहीं बदलते। समय रहते अगर इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में पंजाब समेत कई राज्यों को मोटापे से जुड़ी है।

यह भी पढ़ें- उत्तरकाशी में बोलेरो वाहन खाई में गिरा, चार युवक हुए घायल; दो हायर सेंटर रेफर
आईसीएमआर की स्टडी पर आधारित रिपोर्ट

बीमारियों की सुनामी का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ फिट दिखने का नहीं, बल्कि जिंदा और स्वस्थ रहने का है।विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक शारीरिक बनावट का मुद्दा नहीं, बल्कि डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य गैर-संचारी बीमारियों की खामोश शुरुआत है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ये आंकड़े इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की इंडिया डायबिटीज स्टडी पर आधारित हैं, जो 2008 से 2020 के बीच देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की गई थी।
हमारी आदतों ने बढ़ाई चिंताएं

भारतीय मानकों के अनुसार, पुरुषों में 90 सेंटीमीटर और महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से अधिक कमर का घेरा एब्डामिनल ओबेसिटी माना जाता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश में सामान्य मोटापे की दर 28.6 फीसदी है, जबकि पेट की चर्बी से प्रभावित आबादी 39.5 फीसदी तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शहरीकरण, बैठकर काम करने की आदत, फास्ट फूड, मीठे पेय पदार्थ और नींद की कमी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।

यह भी पढ़ें- बठिंडा में दिनदहाड़े लूट; लकवाग्रस्त दुकानदार से की मारपीट, गला दबा कर नकदी लेकर फरार बदमाश
कास्मेटिक प्राब्लम समझने की भूल ना करें

डाक्टरों का कहना है की मोटापे को अब कास्मेटिक प्राब्लम समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। ओबेसिटी एक बीमारी है, जो डायबिटीज, घुटनों की परेशानी, स्लीप एपनिया और हृदय रोग जैसी कई गंभीर समस्याओं को जन्म देती है। खासतौर पर पेट की चर्बी शरीर के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यह सीधे मेटाबालिज्म और हार्ट पर असर डालती है। इसके अलावा तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खान-पान इसकी सबसे बड़ी वजह हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस खतरे से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत लाइफस्टाइल अप्रोच अपनाई जा रही है। इसके तहत पोषण, व्यायाम और जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथारिटी आफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ईट राइट मूवमेंट भी लोगों को कम नमक, कम चीनी और कम फैट वाला भोजन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

यह भी पढ़ें- मुक्तसर: बढ़ते पारे ने बढ़ाई किसानों की धड़कन, गेहूं की 2.16 लाख हेक्टेयर फसल पर छाए संकट के बादल
Pages: [1]
View full version: एब्डोमिनल ओबेसिटी में पंजाब दूसरे स्थान पर; बदलती जीवनशैली का असर, राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा स्वास्थ्य संकट