सुप्रीम कोर्ट का UPSC को सख्त निर्देश, स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर पर हलफनामे के लिए दी मोहलत
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/16/article/image/sc-(1)-1771265463895_m.webpसुप्रीम कोर्ट ने UPSC को स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर पर हलफनामे के लिए दी मोहलत
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्क्रीन-रीडर साफ्टवेयर को लेकर हलफनामा दाखिल करने के लिए सोमवार को यूपीएससी को एक सप्ताह का समय दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए स्क्रीन-रीडर साफ्टवेयर के इस्तेमाल की प्रस्तावित कार्ययोजना, समयसारिणी और तौर-तरीकों के बारे में भी बताया गया हो।
पिछले साल तीन दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को निर्देश दिया था कि वह परीक्षाओं की अधिसूचना में ऐसा नियम शामिल करे, जिससे पात्र अभ्यर्थी परीक्षा से कम से कम सात दिन पहले तक लेखक (स्क्राइब) बदलने का अनुरोध कर सकें।
कोर्ट ने यूपीएससी को दो महीने के अंदर स्क्रीन-रीडर साफ्टवेयर संबंधी अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को भी कहा था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष जब यह मामला सोमवार को सुनवाई के लिए आया तो यूपीएससी की ओर से पेश वकील ने कहा, हम निर्देशों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।
हमें अनुपालन हलफनामा रिकार्ड पर रखने के लिए एक सप्ताह का समय चाहिए। पीठ ने यूपीएससी को अपने तीन दिसंबर के आदेश के अनुसार अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया और मामले की सुनवाई 23 फरवरी को तय की।
दिसंबर 2025 के आदेश में शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि दिव्यांगों को दिए गए अधिकार समानता, सम्मान और भेदभाव नहीं करने के संवैधानिक वादे की अभिव्यक्ति हैं। शीर्ष अदालत ने याचिका पर अपना फैसला सुनाया। याचिका में पात्र उम्मीदवारों के लिए स्क्रीन-रीडर साफ्टवेयर से लैस लैपटाप के उपयोग की अनुमति देने के साथ-साथ सुलभ डिजिटल प्रश्न पत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी।
फैसले में शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि लेखक बदलने के पात्र अभ्यर्थी के आवेदन पर सही तरीके से विचार किया जाए और आवेदन प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर तार्किक आदेश देकर उसका निपटारा करे।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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