टाटा स्टील USIL का बिजली दरों में 17% वृद्धि का प्रस्ताव, जन सुनवाई में उठा विरोध
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/17/article/image/Jamshedpur-News-(34)-1771290591070_m.webpजागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (यूएसआइएल) ने अपनी बिजली की वर्तमान दर में 17 प्रतिशत बढ़ाेतरी का प्रस्ताव दिया है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा सोमवार दोपहर आदित्यपुर आटो कलस्टर में जन सुनवाई हुई जिसमें आयोग के चेयरमैन नवनीत कुमार की अध्यक्षता व विधिक सदस्य महेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में सभी उपभोक्ताओं से बिजली दर में बढ़ोतरी पर सुझाव मांगा गया।
कंपनी प्रबंधन ने अपने फिक्सड चार्ज पर न्यूनतम 10 व अधिकतम 115 रुपये जबकि एनर्जी चार्ज में न्यूनतम 60 पैसे से अधिकतम एक रुपये पांच पैसे बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा कंपनी ने वैसे शहरी कामर्शियल उपभोक्ता जो पांच किलोवाट तक बिजली का उपभोग करते हैं उनके एनर्जी चार्ज में 25 पैसे प्रति यूनिट और रेलवे, इंजीनियरिंग व मिलिट्री स्टेशन के एनर्जी चार्ज पर पांच पैसे प्रति यूनिट घटाने का प्रस्ताव दिया है।
इससे पहले कंपनी की ओर से चीफ सुमन मंडल ने सरायकेला-खरसावां के लिए कंपनी का वर्ष 2024-25 का ट्रू-अप, वर्ष 2025-26 का एनवल परफार्मेंस रिव्यू (एपीआर), वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 का बिजनेस प्लान व मल्टी ईयर टैरिफ सहित वर्ष 2026-27 का एनवल रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) प्रस्तुत किया।
बड़ी चुनौती है भूमिगत केबल क्षतिग्रस्त होना
अपने बढ़ोतरी प्रस्ताव के तहत कंपनी प्रबंधन ने बताया कि सरायकेला-खरसावां में भूमिगत केबल का क्षतिग्रस्त होना हमारे लिए बड़ी चुनौतियां हैं। जुडको, गेल, जेबीवीएनएल, एएमसी टेलीकाम सहित अन्य कंपनियों ने अलग-अलग कारणों से खुदाई करने से उनके केबल क्षतिग्रस्त हुए। इसके अलावा वन क्षेत्र में अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना और ट्रांसफार्मर से तेल की चोरी बड़ी चुनौती है।
पांच साल में कंपनी को चाहिए 935 करोड़ रुपये
टाटा स्टील यूआइएसएल ने वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 के लिए अपना मल्टी ईयर टैरिफ प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि कंपनी के पास वर्तमान में 7,572 उपभोक्ता हैं जिन्हें 1,117.46 मिलियन यूनिट की बिजली आपूर्ति की जा रही है। कंपनी प्रतिवर्ष पूंजीगत व्यय में 30 करोड़ रुपये और पांच साल में 150 करोड़ रुपये खर्च करेगी। पांच वर्षों में उसके उपभोक्ता बढ़कर 15,568 हो जाएंगे जिसके लिए उन्हें 1,377.54 मिलियन यूनिट बिजली की आवश्यकता होगी। इसमें उनके 935.21 करोड़ रुपये की जरूरत होगी।
तय फार्मूले पर होगी बढ़ोतरी : विधिक सदस्य
आयोग के विधिक सदस्य महेंद्र प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि कंपनी ने भले ही 17 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है लेकिन उनके आडिट रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद तय फार्मूले के तहत ही बढ़ोतरी होगी ताकि उपभोक्ता को परेशानी न हो और बिजली वितरण कंपनी की स्थिति भी बेहतर रहे।
पैसा सरप्लस हो और रेवेन्यू गैप का रखें ख्याल : चेयरमैन
जन सुनवाई की अध्यक्षता करते हुए चेयरमैन नवनीत कुमार ने कहा कि कंपनी अपने ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन लास को कम करें। पूंजीगत व्यय में कंपनी अच्छा निवेश कर रही है लेकिन पैसा हमेशा सरप्लस रहे और रेवेन्यू गैप ज्यादा न हो, इसका ख्याल हमेशा से कंपनी को रखना होगा। उन्होंने बताया कि पहले बढ़ोतरी के प्रस्ताव आयोग टाल देती थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अब रेवेन्यू गैप नहीं बढ़ना चाहिए नहीं तो टैरिफ में भी बढ़ोतरी होगी।
किसने क्या कहा
हाईकोर्ट ने पांच जनवरी को विद्युत शुल्क वापस ले लिया है। हमारा 166 करोड़ रुपये कंपनी के पास जमा है जिसे हमें ब्याज के साथ वापस किया जाए। -संतोष खेतान, पूर्व अध्यक्ष, एशिया
कंपनी का वर्तमान डिस्ट्रीब्यूशन लास (टीएंडडी) 1.68 प्रतिशत है। कंपनी ने अपने पंचवर्षीय प्लान में इसे बढ़ाकर तीन प्रतिशत दिखाया है जबकि उपभोक्ता बढ़ने के साथ दक्षता के तहत यह कम होना चाहिए। -हर्ष अग्रवाल, उद्यमी
बिजली लेने के समय कंपनी इंस्टालेशन चार्ज लेती है और क्षमता बढ़ाने पर फिर से चार्ज मांगा जाता है जो तर्कसंगत नहीं है। -दशरथ उपाध्याय, उपाध्यक्ष, एशिया
दो साल से पावर क्षमता बढ़ाने के लिए दौड़ रहे हैं। आन डिमांड कनेक्शन की सुविधा नहीं है और इंस्टालेशन चार्ज में पारदर्शिता हो। -अशोक गुप्ता, सचिव, एशिया
उपभोक्ताओं को अपना लोड बढ़वाने के लिए एक साल तक कंपनी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। दो साल पूर्व किया आवेदन आज तक लंबित है। -संतोष सिंह, उद्यमी
ऋद्धि-सिद्धी इनक्लेव में पावर क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव आज भी लंबित है। ट्रांसपोर्ट कालोनी व 28 नंबर में बिजली दी जाए। -राजन सिंह, उद्यमी
17 प्रतिशत बढ़ोतरी से उद्यमी जीवित नहीं रह पाएंगे। 40 एचपी पावर लोड बढ़ाने के लिए कंपनी आठ लाख रुपये मांगती है जो तर्कसंगत नहीं है। -सुधीर सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष, सिंहभूम चेंबर
17 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग बहुत ज्यादा है। कंपनी प्रतिमाह बिल में सरचार्ज जब जोड़ती है तो अब अतिरिक्त मद में क्यों बढ़ोतरी की जा रही है। -अनिल गुप्ता, उद्यमी
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