NCF: नक्सली-आतंकी हमलों में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगा केंद्र का सहारा, गृह विभाग ने झारखंड पुलिस से मांगे नाम
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/17/article/image/National-Children\“s-Fund-1771321438715_m.webpकेंद्र सरकार नेशनल चिल्ड्रेन फंड। AI जनरेटेड फोटो
राज्य ब्यूरो, रांची। नेशनल चिल्ड्रेन फंड (एनसीएफ) से राज्य के बलिदानियों के बच्चों के शैक्षणिक विकास के लिए केंद्र सरकार आर्थिक मदद करेगी। तीन कैटेगरी में देश के 150 बच्चों को केंद्र प्रत्येक वर्ष यह अनुदान स्वीकृत करेगी। इस कैटेगरी का मकसद इन बच्चों की देखभाल और शिक्षा विकास के लिए वित्तीय मदद देना है।
केंद्र की इस योजना से झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसएसपी-एसपी को अवगत कराया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी एसएसपी-एसपी से ऐसे योग्य बच्चों की अनुशंसा राज्य सरकार के गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को भेजने का निर्देश दिया है और उसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भी उपलब्ध कराने को कहा है।
नेशनल चिल्ड्रेन फंड (एनसीएफ) वैसे बच्चों को केयर एंड एजुकेशन प्रदान करता है, जो आतंकी वारदात, वामपंथी या माओवादी हमले या क्रास बार्डर फायरिंग की वजह से अनाथ हो चुके हैं।
केंद्र में मंत्रियों के समूह ने 15 जुलाई 2025 को नेशनल फाउंडेशन फार कम्यूनल हार्मनी (एनएफसीएच) को बंद करने के बारे में निर्णय लिया था।
इसके बाद 18 जुलाई 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इस बात की जानकारी दी थी कि एनएफसीएच की प्रोजेक्ट असिस्ट के तहत सभी मौजूदा लाभुक एनसीएफ के तहत कवर होंगे।
एनसीएफ केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के माध्यम से मैनेज होता है। इसका लाभ वैसे लाभुक को मिलेगा, जो या तो 25 साल की उम्र के नहीं हो जाते या फिर अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर लेते। एनसीएफ का प्रबंधन सावित्रीबाई फुले नेशनल इंस्टीच्यूट आफ वीमेंन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट (SPNIWCD) कर रहा है।
एनसीएफ के संदर्भ में दिए गए केंद्र के दिशा-निर्देश में वर्तमान में एनएफसीएच के तहत मणिपुर में 1096 बच्चे, असम में 184 बच्चे, बिहार में सात, गुजरात में एक, जम्मू-कश्मीर में 388, छत्तीसगढ़ में 460 बच्चे, दिल्ली में 11 बजे, ओडिशा में 15 बच्चे प्रोजेक्ट असिस्ट के तहत मदद ले रहे हैं।
इन सभी बच्चों को नेशनल चिल्ड्रेन फंड से तब तक आर्थिक सहायता मिलेगी, जब तक वे 25 साल के नहीं हो जाते हैं या अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर लेते हैं या जो भी पहले हो।
इसके लिए संबंधित जिला दंडाधिकारी, कलेक्टर, जिला कमेटी आवश्यक सहयोगी दस्तावेजे जैसे आय प्रमाण पत्र, प्रोग्रेस रिपोर्ट व दूसरे सत्यापित दस्तावेज एनसीएफ को भेजते रहेंगे ताकि बिना किसी रुकावट के लाभुक बच्चों को वित्तीय मदद मिलती रहे।
किस कैटेगरी के लिए मिलेगी कितनी सहायता राशि
[*]क्लास 12वीं या आइटीआइ या डिप्लोमा कोर्स या कंप्यूटर कोर्स आदि तक : 1250 रुपये प्रतिमाह, प्रति बच्चा।
[*]स्नातक या स्नात्कोत्तर के लिए : 1500 रुपये प्रतिमाह, प्रति बच्चा।
[*]मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि के लिए : 1750 रुपये प्रतिमाह, प्रति बच्चा।
बच्चों के चयन की यह होगी प्रक्रिया
लाभुक बच्चों के चयन के बाद प्रस्ताव संबंधित राज्य व केंद्र शासित प्रदेश के गृह विभाग के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा।
इसके लिए जिला दंडाधिकारी, उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति योग्य बच्चों की पहचान व उनका सत्यापन करेगी और सही तरीके से उनकी अनुशंसा राज्य सरकार के गृह विभाग को करेगी। वहां के विचार के लिए केंद्रीय गृह मंद्धालय व एनसीएफ से विचार के लिए अनुशंसा जाएगा।
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