खुद मंत्री रहा हूं, मुझे टाइम लेने की जरूरत नहीं...; विधानपरिषद में किस बात पर बिफरे RJD के सीनियर लीडर ?
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/17/article/image/Mangal-Pandey-and-siddiqi-1771339191164_m.webpविधान परिषद में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी में हुई बहस।
राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar Politics: बिहार विधानपरिषद में मंगलवार को राजेंद्रनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की व्यवस्था पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और राजद विधानपार्षद अब्दुलबारी सिद्दिकी में खूब बहस हुई।
पहली पाली की कार्यवाही के पहले ही प्रश्न पर करीब 15 मिनट तक दोनों पक्ष दलील देते रहे। समाधान के लिए सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अब्दुल बारी सिद्दिकी से कहा कि आप मंत्री से टाइम लेकर मिल लीजिएगा।
इस पर सिद्दिकी ने मुस्कुराते हुए कहा कि मुझे टाइम लेने की जरूरत नहीं है। ये जहां बैठे हैं, वहां मैं भी मंत्री रह चुका हूं। इस पर मंगल पांडेय ने कहा कि यह भी देख लीजिए कि उस समय अस्पतालों की स्थिति क्या थी?
इमरजेंसी सेवा बंद रहने पर उठाए सवाल
आपलोगों ने क्या हालत कर दी थी? यह किसी से छिपा नहीं है। सिद्दीकी ने पलटवार किया- देख रहे हैं, अस्पताल के साथ आपकी भी स्थिति ठीक हुई है।
दरअसल, सिद्दिकी ने सवाल किया था कि राजेंद्रनगर सीएचसी करोड़ों रुपये की लागत से बना। यहां डाॅक्टरों से लेकर नर्सिंग स्टाफ तक के पद खाली हैं, जिसके कारण इमरजेंसी सेवा बंद पड़ी है।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने जवाब दिया कि राजेंद्रनगर सीएचसी में मानवबल की तुलना में प्रसव की संख्या कम है।
मरीज कम आ रहे तो नई नियुक्ति का मतलब नहीं
इसका कारण महज कुछ किमी की दूरी पर ही पीएमसीएच और एनएमसीएच जैसे बड़े अस्पतालों की बेहतर सुविधाएं हैं। सीएचसी में दो साल में महज 29 प्रसव हुए हैं।
जब पहले से ही मौजूद डाॅक्टरों व कर्मियों के हिसाब से मरीज कम आ रहे तो फिर नई नियुक्ति का मतलब ही नहीं है। सीएचसी में प्रतिनियुक्त डाक्टरों के कामकाज की रिपोर्ट मांगी गई है।
इसमें लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। सिद्दिकी ने इस मामले में आसन से संज्ञान लेने को कहा इस पर मंगल पांडेय ने तुरंत प्रतिक्रिया दी कि विभाग और मंत्री इसके लिए सक्षम हैं।
मेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए बनेंगे नए ट्रीटमेंट केंद्र : मंगल
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने विधानपरिषद में बताया कि राज्य के विभिन्न अस्पतालों से निकलने वाले 28 हजार किलोग्राम बायोमेडिकल कचरे के लिए पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और गया में चार बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी है, जहां वैज्ञानिक तरीके से इनका निस्तारण किया जाता है।
मेडिकल कचरे की मात्रा को देखते हुए नए बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट केंद्र की स्थापना करने की भी योजना है। इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
वह महेश्वर सिंह के तारांकित प्रश्न का जवाब दे रहे थे। मंत्री के जवाब में महेश्वर सिंह, डा. राजवर्धन आजाद, सच्चिदानंद राय ने कहा कि प्रमंडल या बड़े जिलों में मेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट सेंटर बनने चाहिए। इस पर मंत्री ने कहा कि वह अपने स्तर से इसको दिखवा लेंगे।
नो वर्क नो पे सिद्धांत पर भुगतान नहीं
वहीं शशि यादव ने संविदा पर कार्यरत एएनएम के कार्य बहिष्कार अवधि का मानेदय भुगतान लंबित रहने को लेकर प्रश्न किया।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कार्य बहिष्कार की गई अवधि का नो वर्क नो पे के सिद्धांत पर मानेदय भुगतान नहीं किया गया है।
इसकी समीक्षा कर बहिष्कार अवधि के नियमितीकरण की जल्द कार्रवाई की जाएगी। जदयू के नीरज कुमार के तारांकित प्रश्न का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मोकामा नगर परिषद क्षेत्र के तहत थाना चौक स्थित शहरी परिवार कल्याण केंद्र का काम अगले वित्तीय वर्ष में शुरू हो जाएगा।
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