मतदाता सूची में धांधली: बंगाल सरकार ने चार डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों समेत 5 पर दर्ज की FIR
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/18/article/image/voter-list-sir-1771359911323_m.webpबंगाल सरकार ने चार डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों समेत 5 पर दर्ज की FIR (सांकेतिक तस्वीर)
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल सरकार ने अंतत: चुनाव आयोग के निर्देश का अनुपालन करते हुए मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपित वेस्ट बंगाल सिविल सर्विस (डब्ल्यूबीसीएस) के चार अधिकारियों समेत पांच लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली।
चार डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों में से दो चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) व दो सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) की भूमिका निभा रहे थे जबकि अन्य एक डेटा एंट्री ऑपरेटर था।
पिछले साल आरोप सामने आने के बाद आयोग के निर्देश पर बंगाल सरकार ने इन सभी को मतदाता सूची के संशोधन के काम से हटा दिया था, हालांकि उनके विरुद्ध कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई थी।
आयोग ने राज्य सरकार को कई बार उन सभी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। इस बाबत पिछले साल बंगाल के तत्कालीन मुख्य सचिव मनोज पंत व पिछले दिनों वर्तमान मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को आयोग ने दिल्ली तलब भी किया था। मुख्य सचिव को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए 17 फरवरी की शाम तक का समय दिया गया था।
राज्य सचिवालय सूत्रों के अनुसार समय सीमा समाप्त होने से पहले ही पांचों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मंगलवार को बातों बातों में इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि आयोग के कहने पर पांचों के विरुद्ध कदम उठाया गया है। उन्होंने हालांकि प्राथमिकी का उल्लेख नहीं किया।
ममता ने आगे कहा कि राज्य सरकार सभी आरोपितों के साथ है। आरोपितों में देवोत्तम दत्त चौधरी व तथागत मंडल, विप्लव सरकार व सुदीप्त दास शामिल हैं। देवोत्तम व तथागत बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में क्रमश: ईआरओ व एईआरओ के तौर पर काम कर रहे थे। विप्लव सरकार व सुदीप्त दास मयना विधानसभा क्षेत्र में क्रमश: यही भूमिका निभा रहे थे। इसके अलावा सुरोजीत हलदर नामक डेटा एंट्री ऑपरेटर शामिल है।
तीन सूक्ष्म पर्यवेक्षक निलंबित
बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) संबंधी कार्यों में लापरवाही के आरोप में तीन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को निलंबित कर दिया है। इनमें दो बैंक प्रबंधक व एक कर निरीक्षक शामिल हैं। तीनों केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं। सीईओ कार्यालय ने तीनों के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने का भी निर्देश दिया है। इससे पहले इसी आरोप में आयोग ने सात एईआरओ को निलंबित करने का निर्देश दिया था।
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