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उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, अस्पताल में नहीं मिला इलाज; एंबुलेंस में हुआ प्रसव

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गर्भवती महिला को अस्पताल के बजाय एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। Jagran



जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भिकियासैण के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों और स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण एक गर्भवती महिला को अस्पताल के बजाय एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।

गनीमत रही कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। 108 एम्बुलेंस कर्मियों की तत्परता से जच्चा-बच्चा सुरक्षित बच सके। वहीं स्वास्थ्य महकमे की घोर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है।

सल्ट ब्लॉक के ग्राम सभा उजराड़ (क्वेराला) निवासी सनवीर हुसैन की पत्नी सबा परवीन (28) को मंगलवार की मध्य रात्रि प्रसव पीड़ा हुई।
पति ने रात 12:23 बजे 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया। जिस पर भिकियासैण से एंबुलेंस समय पर मौके पर पहुंची। सबा परवीन को नजदीकी पीएचसी रतखाल ले जाया गया, लेकिन वहां करीब 20 मिनट तक कोई भी चिकित्सक या स्टाफ मौजूद नहीं मिला।

प्रसव पीड़ा बढ़ने पर स्वजन उन्हें सीएचसी भिकियासैण ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में गहनाखाल के पास दर्द अत्यधिक बढ़ गया। ऐसे में एम्बुलेंस में तैनात फार्मासिस्ट भाष्कर ने सूझबूझ और मेहनत से बुधवार की तड़के 2:45 बजे एंबुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराया।

सबा परवीन ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बाद में जच्चा-बच्चा दोनों को सीएचसी भिकियासैण में भर्ती कराया गया, जहां दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं। स्वजनों ने फार्मासिस्ट भाष्कर और चालक गोपाल सिंह की प्रशंसा करते हुए उन्हें “भगवान” जैसा बताया।

भाष्कर अब तक 108 एम्बुलेंस में 14 सुरक्षित प्रसव करा चुके हैं। यह घटना स्वास्थ्य विभाग की जमीनी हकीकत और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकीय सेवाओं की गंभीर कमी को उजागर करती है।

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