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कश्मीर में रमजान की धूम; बाजारों में छाई रौनक; जोरों पर तैयारियां

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कैप्शन: कश्मीर में रमजान की धूम; बाजारों में छाई रौनक (फाइल फोटो)



जागरण संवाददाता,श्रीनगर। घाटी में पाक रमजान शुरू हो रहा है। वीरवाको पहला रोजा होगा। 29-या 30 दिनों तक रखे जाने वाले रोजों की तैयारी के लिए लोग जहां धार्मिक उत्साह के साथ तैयारी कर रहे है वहीं सहरी व इफतारी के लिए मेन्यू तय करने के लिए भी तैयारियां जोरों पर है।

श्रीनगर और उसके आस-पास के बाज़ारों में चहल-पहल देखने को मिल रही है जहां स्थानीय लोग ज़रूरी चीज़ें, खासकर खजूर,सूखे व ताजा फल,शर्बत आदि,खरीद रहे हैं।

रमजान के उपलब्क्षय में अधिकांश बाजारो में खजूर की विभिन्न प्रजातियां जिनमें कलमी, सफ़वी,सुगई,अजवाह,मबरूक, मेदजूल जैसी किस्मों की जो बहुत ज़्यादा डिमांड में रहती है, देखने को मिल रही है।लालचौक के कुकरबाजार,महाराजबाजार व सराईबाला बाजारों में भी दिनभर लोग रमजान के लिए दरकार व्सतुओं की खरीददारी में व्यस्त रहे। वहीं इस अवसर पर मसजिदों,दरगाहो व खानकाहों में नमाजियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।

सराईबाला बाजार में खजूरों तथा बाकी सामान की खरीददारी कर रहे एक व्यक्ति परवेज अहमद लोन ने कहा,कल से रोजे रखने हैं। बस सहरी इफतारी के लिए बंदोबस्त कर रहा हूं। लोन ने कहा,बाराजों में आला किस्म के खजूरें आई है। रेट जरा महंगी हैं लेकिन खजूरें खरीदनी जरूरी है। क्योंकि खजूरों के बगैर हमारा गुजारा नही है। लो ने कहा,खजूर से रोजना खोलना हमारे नबी की सुन्नत है ।

रमजान की खरीददारी कर चुके लियाकत अहमद खान नामक एक और व्यक्ति ने कहा,इस पाक महीने की बात ही कुछ है। रूहानियत से भरा। बरकत वाला महीना। खान ने कहा,यह महीना इबादत के लिए होता है। हर मुसलमान की तन्ना होता है कि इस पाक महीने में नेक काम करे।

मोहम्मद अशरफ नामक एक अन्य व्यक्ति ने कहा,पाक महीना शुरू हो रहा है। हमारी सरकार से गुजारिश है कि इस महीने में बिजली खासकर सहरी इफतारी में बिना किसी बाधा के उपलब्ध रखी जाए। साथ ही बाजारोंं की चैकिंग भी बढ़ाई जाए क्योंकि इस महीने में भी कुछ लोग ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए काला बाजारी कर हम गरीब लोगों को लूटते हैं।

सनद रहे कि इस महीने की खासियत सेहरी (सुबह-सुबह का खाना) इकट्ठा होना, सामूहिक इफ़्तार (रोज़ा तोड़ना), और स्थानीय मस्जिदों में रात में खास तरावीह की नमाज़ें होती हैं। सेहरी के लिए पारंपरिक सेहरख्वान (ढोल बजाने वाले) इस आध्यात्मिक, लेकिन जीवंत माहौल को और भी बेहतर बनाते हैं, जो सुबह के खाने के लिए लोगों को जगाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

बता देते हैं कि 29-30 रोजा मुकम्मल करने के बाद मुसलिम समुदाय के लोग शुकराने के तौर पर ईदुल फितर मनाते हैं। R इस्लामी महीने के शवाल की पहली तारीख को मनाई जाती है।
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