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पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक संकट: आधे से ज्यादा प्रिंसिपल के पद खाली, डीपीसी बैठकों की अनियमितता बनी वजह

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पंजाब के सरकारी स्कूलों में आधे से अधिक प्रिंसिपल पद खाली (फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रिसिंपल के लगभग आधे पद आज भी खाली पड़े हैं। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में करीब 1950 प्रिंसिपल पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 900 से अधिक पद लंबे समय से रिक्त हैं। इस संकट का सबसे बड़ा कारण विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकों का नियमित रूप से न होना बताया जा रहा है।

आखिरी बार डीपीसी की बैठक 29 नवंबर 2022 को हुई थी, जिसमें 189 कर्मचारियों को प्रिंसिपल पद पर पदोन्नत किया गया था। लेकिन इनमें से कई अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं और नए प्रमोशन नहीं होने से खाली पदों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

फरीदकोट जिले के स्कूलों में कार्यरत प्रिंसिपलों ने बताया कि उन्हें एक साथ तीन से चार स्कूलों का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। इससे न तो किसी एक स्कूल पर पूरा ध्यान दिया जा सकता है और न ही शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार संभव है। वरिष्ठ लेक्चरर भी इस स्थिति से बेहद नाराज हैं। कई ऐसे शिक्षक हैं, जो 24 से 26 साल की सेवा पूरी करने के बावजूद आज तक एक भी प्रमोशन नहीं पा सके।

उनका कहना है कि अन्य विभागों में उनके जूनियर्स भी कई बार पदोन्नत हो चुके हैं, जबकि शिक्षा विभाग में प्रमोशन की प्रक्रिया ठप पड़ी है। इससे कर्मचारियों में भारी निराशा और असंतोष फैल रहा है। 16 फरवरी 2026 को विभाग की ओर से जब डायरेक्ट रिक्रूट लेक्चरर्स का डेटा मांगा गया, तो यह एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 500 से अधिक लेक्चरर 20 साल से ज्यादा समय से उसी पद पर कार्यरत हैं। इन्हें आज तक कोई पदोन्नति नहीं मिली।

वहीं, प्रिंसिपल के पद पर सीधी भर्ती भी कानूनी विवादों में उलझी रही है और 2019-20 के बाद कोई नई भर्ती नहीं हो पाई। जब इस मुद्दे पर स्कूल शिक्षा विभाग की सचिव सोनाली गिरी, आईएएस से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि सरकार इस समस्या से अवगत है और जल्द ही खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सके और शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हो सके।
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