deltin33 Publish time 2026-2-19 08:56:18

टाटा संस में एन चंद्रशेखरन का तीसरा कार्यकाल तय! बोर्ड की मंजूरी अगले हफ्ते; पिछले 5 साल में कंपनी का प्रॉफिट हुआ तिगुना

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एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर लगेगी मुहर



नई दिल्ली। टाटा ग्रुप की टाटा संस एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) की तैयारी कर रही है। दरअसल कंपनी का बोर्ड अगले हफ्ते एन चंद्रशेखरन को तीसरे टर्म के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर फिर से अपॉइंट करने को फॉर्मल मंजूरी दे देगा, जो उनके दूसरे टर्म के खत्म होने से ठीक एक साल पहले उठाया जाने वाला कदम होगा। उसके बाद ईजीएम में इस फैसले पर मुहर लगेगी। यह प्रस्ताव 65 साल की उम्र के बाद नॉन-एग्जीक्यूटिव रोल पर लागू रिटायरमेंट पॉलिसी में एक छूट है। 2016 में भी इसी तरह की छूट दी गई थी, जब रतन टाटा ने साइरस मिस्त्री की जगह चेयरमैन का पद संभाला था।
टाटा ट्रस्ट्स लगा चुका मुहर

चंद्रशेखरन जून में 63 साल के हो जाएंगे। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के मेजोरिटी शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स ने पिछले साल अक्टूबर में ही चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव रोल में फिर से अपॉइंट करने के लिए एकमत से प्रस्ताव पास कर दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का टॉप मैनेजमेंट अगले हफ्ते टाटा संस बोर्ड के सामने अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक प्रेजेंटेशन देगा, जिसका मकसद तेजी से AI-लेड इनोवेशन के बीच TCS समेत टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में हुई हालिया बिकवाली के बाद बोर्ड की चिंताओं को दूर करना है।
एग्जीक्यूटिव रोल में दोबारा नियुक्ति जरूरी

इस समय ग्रुप की TCS पर अधिक फोकस इसलिए है, क्योंकि क्लाउड कोवर्क जैसी ग्लोबल AI एडवांसमेंट्स, पारंपरिक IT सर्विस बिजनेस मॉडल के लिए खतरा बनने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टाटा संस के बोर्ड को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एयर इंडिया के जरूरी अपडेट्स के बारे में भी बताया जाएगा।
बताया जा रहा है कि लीडरशिप में बने रहने का संकेत देने के लिए एग्जीक्यूटिव रोल में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति जरूरी है। इससे वह उन जरूरी कामों को आगे बढ़ा पाएंगे जिनमें सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक गाड़ी की बैटरी और एयर इंडिया में $120 बिलियन का निवेश हुआ है।
टाटा संस का रेवेन्यू

टाटा संस का रेवेन्यू FY25 में 24% बढ़कर 5.92 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि नेट प्रॉफिट एक साल पहले के मुकाबले 17% घटकर 28,898 करोड़ रुपये रह गया। टाटा ग्रुप ने पिछले पांच सालों में रेवेन्यू लगभग दोगुना और नेट प्रॉफिट और मार्केट कैपिटलाइजेशन तीन गुना से ज्यादा किया। इस दौरान इसने “फ्यूचर फिट” बनने के लिए 5.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।

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