ट्रेनों में एसी खराब होने पर अब तुरंत मिलेगी मदद, पूर्वोत्तर रेलवे ने तय की कोच इंचार्ज की बर्थ
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/traintime-1771564161561_m.webp71 ट्रेनों में एसी कर्मियों के लिए स्लीपर व एसी क्लास में निर्धारित हुए दो- दो बर्थ
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे की ट्रेनों में एसी खराब होने, वातानुकूलन कम होने या तकनीकी गड़बड़ी पर अब यात्रियों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। वातानुकूलित कोचों में किसी भी तरह की दिक्कत होने पर एसी कोच इंचार्ज और सहायक तुरंत पहुंचेंगे।
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने गोरखधाम, अमरनाथ और हमसफर एक्सप्रेस समेत लंबी दूरी की 72 ट्रेनों में ड्यूटी पर तैनात एसी कोच इंचार्ज और सहायक के लिए दो-दो बर्थ निर्धारित कर दिया है। हमसफर एक्सप्रेस के बी वन में 71 और 72 को छोड़कर अन्य सभी वातानुकूलित व शयनयान श्रेणी वाली एक्सप्रेस ट्रेनों में एस टू में 79 और 80 नंबर की बर्थ आरक्षित कर दी गई है, जो अब आरक्षण चार्ट में भी प्रदर्शित होगा।
एसी कोच इंचार्ज और सहायक निर्धारित कोच व बर्थ पर ही मिलेंगे। किसी भी शिकायत का तत्काल निस्तारण करेंगे। पूर्वोत्तर रेलवे के उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (यात्री सेवाएं) आशीष कुमार त्रिपाठी ने एसी कोच इंचार्ज और सहायक के लिए ट्रेनों में कोच व बर्थ निर्धारित कर संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।
पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर को 18 फरवरी, 2026 को लिखे गए पत्र के माध्यम से उन्होंने कहा है कि रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद पहले कुछ ट्रेनों में यह प्रक्रिया लंबित थी, लेकिन अब सभी सूचीबद्ध ट्रेनों में सीटों का निर्धारण कर उसे प्रणाली में दर्ज कर दिया गया है। रेलवे प्रशासन का दावा है कि यह कदम यात्री सुविधा को केंद्र में रखकर उठाया गया है और इससे ट्रेनों की सेवा गुणवत्ता में सीधा सुधार होगा।
यह भी पढ़ें- UP में दो वर्ष से नहीं पकड़े गए नए गिद्ध, चित्रकूट से लौटी टीम; नए नियम के तहत अब भारत सरकार मंत्रालय से लेनी होगी अनुमति
एसी कोच इंचार्ज और सहायक लगभग सभी मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ चलते हैं। वह ट्रेन को लेकर गंतव्य तक पहुंचते हैं और उसे वापस लेकर आते हैं। उनकी ड्यूटी लगातार 06 से 130 घंटे की हो जाती है। लेकिन, ट्रेन में उनके बैठने व सोने लिए कोई जगह निर्धारित नहीं थी। कुछ एसी कोचों में इधर-उधर भटकते रहते थे तो कई पावरकार में बैठे मिल जाते थे।
अक्सर, उन्हें खोजने में यात्रियों का पसीना छूट जाता था। इधर, वातानुकूलित कोचों में गड़बड़ी के साथ एसी कोच इंस्पेक्टर और सहायक की उदासीनता की शिकायतें भी बढ़ गई थीं। वातानुकूलित कोच के यात्री सिस्टम पर सवाल उठाने लगे थे।
दरअसल, गर्मी में वातानुकूलित कोचों की शिकायतें बढ़ जाती हैं। कभी कम वातानुकूलन का तो कभी एसी फेल होने की शिकायत। समय से एसी दुरुस्त नहीं होने पर यात्रियों का आक्रोश बढ़ जाता है। यात्री कभी ट्रेन रोकते हैं तो कभी स्टेशन पर प्रदर्शन को मजबूर होते हैं।
Pages:
[1]