डार्क वेब से जुड़ा है अदालतों में ब्लास्ट की धमकियों का मामला, धरपकड़ आसान नहीं
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/73178138-copy-1771564790814_m.webpडार्क वेब से जुड़ा है मामला. Concept Photo
नरेश कुमार, नैनीताल। जिला कोर्ट के बाद हाई कोर्ट समेत प्रदेश के अन्य जिलों के न्यायालयों में आए धमकी भरे मेल के सोर्स तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं है। जिस तरह एक के बाद एक संदेश भेजे जा रहे है इससे तय है कि मामला तथाकथित डार्क वेब से जुड़ा हो सकता है।
साइबर सेल व एसटीएफ की प्रारंभिक जांच में डार्क वेब, टोर ब्राउजर व अमेजन क्लाउड जैसे सर्वरों का इस्तेमाल करने के तथ्य सामने आए है। वीपीएन व प्राक्सी सर्वर के जरिये मेल भेजने वाले ने अपनी पहचान को सबकी नजरों से दूर रखा है। हालांकि हाई कोर्ट तक भी धमकियों की आंच पहुंचने के बाद पुलिस साइबर सेल, एसटीएफ व केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के भी जांच में जुटे होने के दावे कर रही है।
16 फरवरी से प्रदेश के न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी दिए जाने का सिलसिला शुरू हुआ था। नैनीताल व उत्तरकाशी जिले के बाद धमकियों का यह सिलसिला अगले दिन टिहरी, अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार समेत अन्य जिलों तक भी पहुंच गया।
चार दिन बाद पुलिस के हाथों में मेल भेजने वाले सोर्स व अपराधी को लेकर कोई पुष्ट जानकारी नहीं है। जिससे पुलिस के अत्याधुनिक सुविधाओं व साइबर अपराधों से निपटने के इंतजामों की भी पोल खोल कर रख दी है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि साइबर सेल व एसटीएफ के समन्वय से सोर्स का पता लगाया जा रहा है।
विदेशों से भी मिले आइपी एड्रेस
आइजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि जिस तरह एक के बाद एक मेल अलग-अलग जिलों को भेजे गए है इसके पीछे बड़ी साजिश उजागर होती है। अप्रैल 2025 में दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भी इस तरह के धमकी भरे संदेश मिले थे। जिससे यह तथाकथित डार्क वेब से जुड़ा हो सकता है। साइबर अपराधी डार्क वेब में वीपीएन व प्राक्सी सर्वर का उपयोग कर असली लोकेशन को छुपा लेते है।
बाहरी देशों में उनकी लोकेशन मिलने से संबंधित डाटा लेने के लिए लंबी कवायद करनी पड़ती है। वर्तमान में मिल रही धमकियों के मामले में विदेशों में भी आईपी एड्रेस ट्रेस हुए है। जिनके सर्विस प्रोवाइडर को डाटा उपलब्ध कराने के लिए संपर्क किया गया है। आइजी ने बताया कि पहली धमकी मिलने के बाद साइबर सेल इस पर जांच कर रहा था।
अब एसटीएफ के समन्वय से भी मामले की जांच की जा रही है। उत्तराखंड से बाहर भी कई राज्यों में इस तरह के धमकी भरे संदेश मिले है। जिसमें तमिल टाइगर्स व आइएसआइ पाकिस्तान का नाम जुड़ने से केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी भी जांच पड़ताल में जुटी हुई है।
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