पीएमएलए में कुर्की पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त-मनी लॉन्ड्रिंग केस में विरासत में मिली संपत्ति भी कुर्क होगी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/Court-News-1771596932805_m.webpअदालत ने कहा कि मनी लांड्रिंग की कार्रवाई में कुर्की के मामलों में पुश्तैनी या विरासत में मिली संपत्ति के लिए कानून में कोई छूट नहीं है।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई में पुश्तैनी संपत्ति को जब्त करने के पहलू पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति नवीन चावला व न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने कहा कि मनी लांड्रिंग की कार्रवाई में कुर्की के मामलों में पुश्तैनी या विरासत में मिली संपत्ति के लिए कानून में कोई छूट नहीं है।
पीएमएलए के तहत अपीलेट ट्रिब्यूनल के 2025 के आदेश के खिलाफ दायर अपील याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि पुश्तैनी संपत्ति होने के कारण पीएमएलए के तहत कुर्की से अपने आप छूट नहीं मिल जाता। कानून पुश्तैनी या विरासत में मिली संपत्ति के लिए कोई छूट नहीं देता।
अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए एक आदमी की अपील याचिका खारिज कर दी। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने आदेश में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सैनिक विहार में अपीलकर्ता की संपत्ति की प्रोविजनल कुर्की की पुष्टि को सही ठहराया था। अपीलकर्ता ने कहा कि संपत्ति उसने कभी नहीं खरीदी थी और उसके पिता ने 1991 में अपनी आय से उनके नाम पर संयुक्त रूप से खरीदी थी, इसलिए उसे कुर्क नहीं किया जा सकता था।
हालांकि, अदालत ने माना कि अपील करने वाले का यह पक्ष कि पुश्तैती संपत्ति तब तक कुर्क नहीं की जा सकती जब तक कि वह गैर-कानूनी पैसे से न खरीदी गई हो, गलत है। पीठ ने देखा कि फैसला देने वाली अथारिटी ने सुबूतों के तहत यह पाया था कि उक्त संपत्ति की कीमत अपराध से हुई आय के बराबर है।
अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि पीएमएमएल की धारा-2(एक)(यू) के मुताबिक सिर्फ आपराधिक गतिविधि के नतीजे में प्रत्यक्ष या परोक्ष तरीके से मिली दागी संपत्ति को ही अपराध से हुई आय कहा जा सकता है। अपीलकर्ता ने दावा किया कि उक्त संपत्ति पर अधिकार उसके मृ़त पिता के जरिए था, इसलिए उसे कुर्क करना पूरी तरह से अस्वीकार्य था।
हालांकि, जांच एजेंसी ने कहा कि अपीलकर्ता ने अपराध से जो पैसा कमाया था, वह फारेन एक्सचेंज के रूप में था। जिसे विदेश भेज दिया गया था और इसलिए वह उपलब्ध नहीं था। कोर्ट को बताया गया कि अपील करने वाले की मौजूदा संपत्ति पीएमएलए के तहत बराबर कीमत की होने के कारण कुर्क कर ली गई है।
यह भी पढ़ें- दिल्ली हाई कोर्ट का निर्देश: डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म का पूर्ण उपयोग कर मजबूत करें स्वास्थ्य ढांचा
यह भी पढ़ें- उन्नाव केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने जयदीप सेंगर की अंतरिम बेल पर दिया बड़ा फैसला, CBI ने किया विरोध
यह भी पढ़ें- \“व्यापार का अधिकार नागरिकों और बच्चों के शोर-मुक्त माहौल के अधिकार के साथ संतुलित हो\“, दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी
Pages:
[1]