दरभंगा डीएमसीएच में ऑक्सीजन पाइपलाइन में गंभीर सुरक्षा खामियां उजागर
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/dmch-1771602216711_m.webpडीएमसीएच के पुराने गायनिक वार्ड में लगे गैस पाइपलाइन का निरीक्षण करते अधीक्षक डॉक्टर जगदीश चंद्र एवं अन्य। जागरण
संवाद सहयोगी, दरभंगा । डीएमसीएच अधीक्षक डा. जगदीश चंद्र ने शुक्रवार को आक्सीजन पाइपलाइन एवं पुराने गायनिक के ओटी का निरीक्षण किया। इस दौरान कई खामियां मिली, जिसको दुरुस्त करने का निर्देश दिया।
उन्हें पुराने गायनिक ओटी में चोरों द्वारा आक्सीजन पाइप काटे जाने की सूचना मिली थी। बताया गया कि यहां तांबे का गैस पाइप लगा हुआ है, जो सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत गंभीर विषय है। यदि कोई मरीज आइसीयू में भर्ती हो और अचानक आक्सीजन गैस की सप्लाई पाइप काटे जाने की वजह से बंद हो जाए तो उसकी जान तक जा सकती है।
निरीक्षण के दौरान अधीक्षक के साथ सिक्योरिटी सुपरवाइजर महेश सिंह, गैस आपूर्ति की देखरेख कर रही एजेंसी शिव शक्ति गैसेस के सुपरवाइजर हिंद केशरी यादव सहित अन्य कर्मचारी मौजूद थे। निरीक्षण के क्रम में ओटी के पीछे घना जंगल पाया गया। इसके अतिरिक्त पीछे के कई गेटों में ताला नहीं लगा था, खिड़कियां टूटी हुई थीं तथा छत का रोशनदान भी क्षतिग्रस्त था।
इसे देखकर अधीक्षक भौचक रह गए। इस संबंध में उन्होंने तत्काल नोडल ऑफिसर डा. अजय से वार्ता की और अविलंब इन खामियों को दूर करने का निर्देश दिया। इसके बाद अधीक्षक ने ट्रामा सेंटर के गैस पाइपलाइन का अवलोकन किया गया।
दोनों सुपरवाइजरों ने बताया कि यहां भी पाइप कटने की आशंका बनी रहती है क्योंकि इसके पीछे भी जंगल का घेरा है। लाइट की समुचित व्यवस्था नहीं होने से परिसर में अंधेरा छाया रहता है जिससे चोरों के लिए गतिविधियां संचालित करना आसान हो जाता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधीक्षक ने लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित करने, झाड़ियों की सफाई कराने तथा कटे हुए आक्सीजन गैस पाइपलाइन को हटाकर सुरक्षित रूप से स्टोर में रखने के निर्देश दिए।
मौके पर मौजूद शिव शक्ति गैसेस के सुपरवाइजर हिंद केशरी यादव से अधीक्षक यह जानना चाहा कि एकरारनामा समाप्त हो जाने के बावजूद कार्य कैसे किया जा रहा है तथा भुगतान किस आधार पर किया जाए।
साथ ही उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि एक स्थान पर लिक्विड गैस आपूर्ति को छोड़कर डीएमसीएच इमरजेंसी, गायनिक वार्ड एवं शिशु विभाग के आक्सीजन प्लांट से आक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पा रही है, तो उन तीनों स्थानों पर स्टाफ की तैनाती का औचित्य क्या है।
बताया गया कि तीनों जगहों के पीएसए आक्सीजन प्लांट बंद हैं, जिसके कारण करोड़ों रुपये की लागत से बाहर से आक्सीजन खरीदकर मंगवाना पड़ रहा है।
इस संबंध में अधीक्षक ने बताया कि तीनों पीएसए आक्सीजन प्लांट को चालू कराने हेतु सरकार को पत्र लिखा गया है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द कार्यरत किया जा सके। ज्ञात हो कि डीएमसीएच बाउंड्री विहीन है। यहां 122 सुरक्षा कर्मियों के भरोसे व्यवस्था संचालित की जा रही है।
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