deltin33 Publish time 2026-2-20 21:56:26

कारगिल से बलूचिस्तान तक... नहीं बदली पाकिस्तान की फितरत, अपने ही सैनिकों को पहचानने से इनकार

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पाकिस्तानी सेना ने पकड़े गए सैनिकों को अपना मानने से इनकार किया



संजय मिश्र, नई दिल्ली। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) द्वारा पकड़े गए सात पाक सैनिकों को छुड़ाने के प्रयास करने की बजाय पाकिस्तानी सेना ने इन्हें अपना मानने से इनकार कर एक बार फिर साबित किया है कि मुसीबत में साथ खड़े होने की बजाय अपने सैनिकों से पिंड छुड़ा लेना पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान की पुरानी रिवायत रही है।

कारगिल युद्ध से लेकर बलूचिस्तान का ताजा वाकया पाकिस्तानी सेना के अपने सैनिकों की वर्दी को पहचानने से इनकार का इतिहास रहा है। खास बात यह है कि पकड़े जाने पर पिंड छुड़ाने की पाकिस्तानी सेना की इस रिवायत की पोल बीएलए द्वारा पकड़े गए उसके सैनिक ही कर रहे हैं।
BLA का पाकिस्तान को अल्टीमेटम

बीएलए के अल्टीमेटम के मद्देनजर जिंदगी और मौत के बीच गहरे खौफ में पाकिस्तानी सेना का पहचान पत्र दिखाते हुए ये सैनिक रो-रो कर प्राण बचाने की गुहार कर रहे हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी ने इन पकड़े गए पाकिस्तानी सैनिकों के बदले अपने कुछ लड़ाकों को छोड़ने की मांग करते हुए पाकिस्तानी सेना को सात दिन की मोहलत देते हुए चेतावनी दी है कि उसके लड़ाकों को छोड़ने को लेकर अगर बातचीत शुरू नहीं की गई तो 21 फरवरी के बाद इन सैनिकों को मार दिया जाएगा।

बलूच लिबरेशन आर्मी ने 14 फरवरी को इन पाकिस्तानी सैनिकों के वीडियो क्लिप जारी करके इन्हें पकड़ कर अपने हिरासत में रखने का दावा किया। वीडियो सामने आने के बाद पाकिस्तानी सेना की एक्स कॉ‌र्प्स और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल ने जवाबी दावे कर इन्हें पाकिस्तानी सैनिक मानने से इनकार कर दिया।
पाक ने मानने से किया इनकार

इतना ही नहीं अगले दिन से बीएलए के दावों को मनगढ़ंत प्रोपेगैंडा बताकर खारिज करने का एक सुनियोजित अभियान भी पाक सेना ने चलाया। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार इसके बाद बीएलए ने पाक सेना के सोशल मीडिया अभियान को पंक्चर करने के लिए नया वीडियो जारी किया जिसमें सातों पाक सैनिक एक साथ बीएलए के बंदूकधारी लड़ाकों की हिरासत में भयभीत हालत में दिख रहे हैं और सबके पास पाकिस्तानी सेना का पहचान पत्र से लेकर कई दस्तावेज हैं।

इनमें से एक सिपाही मोहम्मद शाहराम पाकिस्तानी सेना का आइडी और नेशनल डेटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी से जारी राष्ट्रीय पहचान पत्र दोनों दिखाते हुए वीडिया में उन्हें अपना मानने से इनकार किए जाने पर रोते हुए बोल रहा है कि अगर ये असली नहीं हैं, तो इन्हें किसने जारी किया?
सैनिकों ने लगाई मदद की गुहार

अपने घर-परिवार का ब्यौरा देते हुए कह रहा कि उसके पिता विकलांग हैं और बड़े बेटे के नाते पूरा परिवार उसी पर निर्भर हैं। साथ ही शाहराम पाक सेना से सवाल कर रहा कि अगर हम आर्मी से नहीं हैं तो हमें भर्ती क्यों किया गया। बीएलए ने खैबर पख्तूनख्वा के बुनेर गांव के दीदार उल्लाह और गुजरांवाला के उस्मान के दस्तावेज दिखाते हुए इस वीडियो में उनके पाकिस्तानी सैनिक होने का प्रमाण दिया है।
कारगिल युद्ध में भी पाक ने किया था ऐसा

इन सैनिकों की रिहाई के लिए बीएलए का पाकिस्तानी सेना को बातचीत के लिए दिया अल्टीमेटम शनिवार को खत्म हो रहा है। बीएलए द्वारा पकड़े गए सैनिकों को अपना मानने से पाकिस्तानी सेना के इनकार के इस ताजा प्रसंग ने 1999 के कारगिल युद्ध में उसकी ऐसी ही करतूत की याद दिला दी है। तब जनरल परवेज मुशर्रफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सेना ने शुरू में इस बात से इनकार किया था कि नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी सेना के नियमित सैनिक घुसपैठ कर रहे थे। काम कर रहे थे।

जबकि कारगिल युद्ध के साक्ष्य और उसके सैनिकों की बरामद लाशें पाकिस्तानी सेना के झूठ की पोल खोल रही थीं। अब खुद को फील्ड मार्शल घोषित करा चुके पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख असीम मुनीर का सैन्य प्रशासन भी उसी अनुरूप मिशन में नाकाम होने के बाद अपने सैनिकों से भी पीछा छुड़ा रहा है।
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