अपने ही देश मे हार गए डोनल्ड ट्रंप, क्या अब फिर से होगी India-US Trade Deal; एक्सपर्ट बोले- 3% रह जाएगा टैरिफ
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/India-US-Trade-Deal-(12)-1771604598003_m.webpअपने ही देश मे हार गए डोनल्ड ट्रंप, क्या अब फिर से होगी India-US Trade Deal; एक्सपर्ट बोले- 3% रह जाएगा टैरिफ
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को उनके ही देश में बड़ा झटका लगा है। उन्हें अपने ही बिछाए जाल में हार का सामना करना पड़ा। 2025 में सत्ता में वापसी करने के बाद टैरिफ-टैरिफ खेलने वाले ट्रंप के टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द (US Supreme Court strikes down Trump Tariffs) कर दिया है। यानी जिस देश पर ट्रंप के पहले जितना टैरिफ था उतना ही टैरिफ हो सकता है। यानी India-US के बीच जो डील हुई है वह फिर से हो सकती है। क्योंकि ट्रंप के आने से पहले भारत पर 2 से 3 फीसदी का टैरिफ लगता था। लेकिन इस डील में यह 18 फीसदी तक है। इसलिए भारत की अमेरिका से फिर से ट्रेड डील हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 2025 में लागू किए गए टैरिफ के लिए कांग्रेस (अमेरिकी संसद) से नहीं ली थी। टैरिफ को लागू करने के लिए उन्होंने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया था। लेकिन अब उनका टैरिफ रद्द हो चुका है।
क्या फिर से होगी India-US Trade Deal?
डोनल्ड ट्रंप को उनके ही देश में झटका लगने के बाद भारत में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि क्या India-US Trade Deal फिर से होगी? इसे लेकर जागरण बिजनेस को पिरामल एंटरप्राइजेज लिमिटेड के चीफ इकोनॉमिस्ट देबोपम चौधरी ने कहा कि देखिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसले को अगर पढ़े तो उसमें साफ कहा गया है हि कि ट्रंप द्वारा लगाया गया टैरिफ रद्द किया जाता है।
इसलिए अब भारत समेत उन सभी देशों पर उतना ही टैरिफ लागू हो जो ट्रंप के आने से पहले थे। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील फिर से हो सकती है। यह निगोशिएबल है। क्योंकि अभी ट्रेड डील पर साइन नहीं हुआ है। इससे पहले भारत पर 3 से 4 फीसदी का टैरिफ लगता था। अब वही लगेगा।
देबोपम चौधरी, पिरामल एंटरप्राइजेज लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री ने जगरण बिजनेस से बातचीत में कहा: “अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान से देखें तो स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को रद्द कर दिया गया है। नतीजतन, भारत सहित सभी प्रभावित देशों पर अब वही पुराना टैरिफ स्तर लागू होगा, जो ट्रंप के कार्यकाल से पहले था। इससे भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की संभावना फिर से मजबूत हो सकती है। बातचीत के जरिए इसे तय किया जा सकता है, क्योंकि अभी कोई अंतिम डील साइन नहीं हुई है। पहले भारत पर महज 3-4 प्रतिशत टैरिफ था, और अब भी वही स्थिति बहाल हो जाएगी।“
ट्रंप के टैरिफ से पहले भारत कितना देता था टैरिफ
2025 में टैरिफ में बड़ी बढ़ोतरी शुरू होने से पहले, भारत ज्यादातर चीजों पर US के मुकाबले कम टैरिफ दे रहा था, जो आम तौर पर 3-4% की रेंज में होता था। ट्रंप के अलग-अलग इंडियन एक्सपोर्ट पर 25% से 50% के प्यूनिटिव टैरिफ लागू होने के बाद, जो अगस्त 2025 में लागू हुए, फरवरी 2026 में एक नई डील ने इन्हें घटाकर 18% कर दिया। हालांकि, अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से यह फिर से 3 से 4 फीसदी हो जाएगा।
6-3 के फैसले से रद्द हुआ ट्रंप का टैरिफ
कंजर्वेटिव चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के 6-3 के फ़ैसले में जजों ने निचली अदालत के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि ट्रंप का 1977 के इस कानून का इस्तेमाल उनके अधिकार से ज़्यादा था। जजों ने फैसला सुनाया कि जिस कानून पर बात हो रही है - इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, या IEEPA - वह ट्रंप को टैरिफ़ लगाने की वह पावर नहीं देता जिसका उन्होंने दावा किया था।
सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर सदस्यों ने यह भी कहा कि इस तरह का मतलब कांग्रेस की शक्तियों में दखल देगा और “मेजर क्वेश्चन्स“ डॉक्ट्रिन नाम के कानूनी सिद्धांत का उल्लंघन करेगा।
ट्रंप टैरिफ का हुआ था खूब विरोध
प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है था टैरिफ से US का सरकारी खजाना भरेगा, देश के इंडस्ट्रियल इलाकों में नई जान आएगी और दुनिया की इकॉनमी US के लिए ज्यादा “फेयर“ होगी। लेकिन इकोनॉमिस्ट ने बार-बार चेतावनी दी है कि सालों से बढ़ी हुई महंगाई के बाद अमेरिकियों के लिए कीमतें और बढ़ने का खतरा है।
टैरिफ को आम तौर पर कांग्रेस (अमेरिकी ससंद) से मंजूरी लेनी होती है, जिसके पास संविधान के तहत टैक्स लगाने का अकेला अधिकार है। लेकिन ट्रंप ने तर्क दिया कि उन्हें इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, या IEEPA के तहत ट्रेडिंग पार्टनर्स पर टैरिफ लगाने का अधिकार है, जो कुछ मामलों में प्रेसिडेंट को नेशनल इमरजेंसी के दौरान इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन को रेगुलेट करने या रोकने का अधिकार देता है।
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