ओडिशा में लैंगिक समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम, ट्रांसजेंडर को राज्य सिविल सेवाओं में प्रवेश की अनुमति
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/21/article/image/OPSC-1771635327115_m.webpजागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ओडिशा में ओडिशा लोक सेवा आयोग (ओपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा के आवेदन पत्र में ‘तृतीय लिंग’ (थर्ड जेंडर) का विकल्प शामिल किया है।
यह समावेशन ओडिशा मानवाधिकार आयोग (ओएचआरसी) के निर्देशों के बाद किया गया, जब एक याचिका में परीक्षा फॉर्म में उपयुक्त लिंग विकल्प के अभाव को उजागर किया गया था। सिफारिश पर कार्रवाई करते हुए, अधिकारियों ने ओसीएस 2025 अधिसूचना में संशोधन कर ‘तृतीय लिंग’ श्रेणी को औपचारिक मान्यता दी।
इस सुधार के साथ ही परीक्षा के पंजीकरण और आवेदन की अंतिम तिथि भी बढ़ा दी गई है, ताकि ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को भाग लेने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यह बदलाव प्रशासनिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। अब ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य सरकारी रोजगार के अवसरों तक पहुंच में पुरुष और महिला उम्मीदवारों के समान अधिकारों का लाभ उठा सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सामाजिक मान्यता को बढ़ाएगा, आत्मविश्वास को मजबूत करेगा और समुदाय के भीतर सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करेगा। साथ ही, शासन में स्थिर और सम्मानजनक करियर तक पहुंच देकर आर्थिक आत्मनिर्भरता के मार्ग भी खोलेगा।
असम, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई भारतीय राज्यों ने पहले ही सार्वजनिक सेवा परीक्षाओं में ऐसे ही उपाय लागू किए हैं। इस सुधार को एक प्रगतिशील कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो सार्वजनिक प्रशासन में गरिमा, प्रतिनिधित्व और समान अवसर प्रदान कर जीवन बदलने की क्षमता रखता है।
ट्रांसजेंडर और ओसीएस अभ्यर्थी दीप्ति महापात्र ने कहा कि मुझे बेहद खुशी हो रही है और गर्व भी महसूस हो रहा है कि ओपीएससी जैसे इतने बड़े भर्ती मंच पर हम ट्रांसजेंडर लोगों को अब प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।
पहले हमारे समुदाय के लिए सिविल सेवा में आवेदन करने का कोई विशेष विकल्प उपलब्ध नहीं था, लेकिन अब यह प्रदान किया गया है। पहले कई ट्रांसजेंडर इससे वंचित रह जाते थे, और अब यह हमारे लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आया है।
Pages:
[1]