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बिहार के पश्चिम चंपारण में पीपी तटबंध पर तेंदुए की चहलकदमी, मजदूरों और ग्रामीणों में दहशत

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West Champaran News: तेंदुआ नोनिया टोली गांव की ओर होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा में चला गया। फाइल फोटो



संवाद सूत्र, पिपरासी (पश्चिम चंपारण)। Gandak Embankment Leopard: गंडक नदी के पीपी तटबंध पर रात तेंदुए की चहलकदमी से इलाके में दहशत फैल गई। सहायक अभियंता के कैंप कार्यालय के समीप तेंदुआ देखे जाने के बाद कटाव निरोधक कार्य में लगे मजदूरों, संवेदक प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों में भय का माहौल है।

संवेदक प्रतिनिधि मंटू सिंह ने बताया कि तेंदुआ करीब 15 मिनट तक तटबंध पर ही डटा रहा। उस समय वे अपने चालक और मजदूरों के साथ पास की झोपड़ी में सो रहे थे।

तभी वहां से एक वाहन गुजरा, जिसकी हेडलाइट की रोशनी पड़ते ही तेंदुआ नोनिया टोली गांव की ओर होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा में चला गया। ग्रामीण बिंदा चौहान ने भी पुष्टि की कि तेंदुआ उनके घर के पास से होकर गुजरा है।

तेंदुए की सक्रियता से लोग इसलिए भी भयभीत हैं, क्योंकि बीते एक माह में पिपरासी दियारे में दो जानवरों और ओझवलिया रेता क्षेत्र में एक बकरी का शिकार हो चुका है। लगभग छह माह पूर्व भी इसी इलाके से वन विभाग ने एक तेंदुए को रेस्क्यू किया था।

घटना की सूचना मिलते ही कार्यपालक अभियंता राजेश कुमार, सहायक अभियंता प्रिंस कुमार यादव और जेई मोहम्मद शम्स ने स्थल का मुआयना किया।

वहीं वन क्षेत्र पदाधिकारी श्रीमान मालाकर ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में वन विभाग की टीम भेजी जा रही है, ताकि ग्रामीणों और मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल से तेंदुओं का आबादी वाले इलाकों की ओर आना एक जटिल समस्या है, जो बदलते पारिस्थितिक तंत्र का परिणाम है।

तेजी से हो रहे शहरीकरण, जंगलों के सिकुड़ने, भोजन की कमी और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण तेंदुए रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा तेंदुए अन्य वन्यजीवों की तुलना में मानव बस्तियों के पास खुद को जल्दी अनुकूलित कर लेते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुए सामान्यतः इंसानों पर हमला करने के उद्देश्य से आबादी में नहीं आते, बल्कि भोजन, सुरक्षा या रास्ता भटकने के कारण यहां पहुंचते हैं।

मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जंगलों का संरक्षण और प्राकृतिक गलियारों (कॉरिडोर) को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है।
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