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डॉक्टर किडनैपिंग केस! आरोपित पुलिसकर्मी अहम पदों पर तैनात, महकमे की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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सीबीआई ने 9 पुलिसकर्मियों को आरोपित बनाया है।



मनोज बिष्ट, चंडीगढ़। डेंटिस्ट मोहित धवन के कथित अपहरण और प्रताड़ना मामले में आरोपित पुलिसकर्मी अहम पदों पर तैनात हैं। इससे पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और आलाअधिकारियों की मेहरबानी पर सवाल उठ रहे हैं।

सीबीआई के चार्जशीट दाखिल किए जाने के बावजूद आरोपित पुलिसकर्मियों को संवेदनशील व पब्लिक डिलिंग वाली महत्वपूर्ण यूनिटों में तैनाती मिलने से सवाल उठ रहे कि ये अपनी पोस्टिंग का पूरा फायदा उठा सकते हैं।

कुछ पुलिसकर्मियों तो वहीं पर तैनात हैं जहां पर रहते हुए उन पर अपहरण करने का आरोप लगा था। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने 9 पुलिसकर्मियों को आरोपित बनाया है। शुरुआत में 10 नाम शामिल थे, लेकिन आरोप पत्र में से काॅन्स्टेबल नीरज कुमार का नाम हटा दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार नीरज कुमार को सरकारी गवाह बनाया जा सकता है। इस मामले में पिछले साल सीबीआई ने सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। करीब एक साल तक चली जांच के बाद सीबीआई ने जिला अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी और दो अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी जोड़ दिए।
चार्जशीट में शामिल नौ पुलिसकर्मी

[*]इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों
[*]एसआई सुरेश कुमार
[*]एएसआई अजमेर सिंह उर्फ अमितोज सिंह
[*]हेड काॅन्स्टेबल अनिल कुमार
[*]काॅन्स्टेबल विकास हुड्डा
[*]काॅन्स्टेबल सुभाष
[*]एएसआई बलवंत
[*]हेड काॅन्स्टेबल रिंकू राम
[*]काॅन्स्टेबल प्रदीप

संवेदनशील पदों पर तैनाती

जब डाॅ. धवन की कथित किडनैपिंग हुई थी, उस समय सभी आरोपित क्राइम ब्रांच में तैनात थे। वर्तमान में इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों सिक्योरिटी विंग में तैनात हैं। एसआई सुरेश कुमार सेक्टर-34 थाने में एडिशनल एसएचओ हैं। एएसआई अजमेर सिंह साइबर सेल में तैनात हैं। हेड काॅन्स्टेबल अनिल कुमार और कांस्टेबल विकास हुड्डा ऑपरेशन सेल में तैनात हैं।

एएसआई बलवंत क्राइम ब्रांच में ही तैनात हैं। काॅन्स्टेबल प्रदीप सेक्टर-39 थाने में तैनात है। हेड कांस्टेबल रिंकू राम आइटी पार्क थाने में तैनात है। गंभीर आरोपों के बावजूद किसी भी आरोपित को गैर-मैदानी ड्यूटी जैसी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा है, जिससे विभाग की भूमिका पर प्रश्न उठ रहे हैं।
गंभीर आरोप और जांच की स्थिति

डाॅ. मोहित धवन ने एक आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने उन्हें जिला अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। 7 जनवरी 2022 को जब डाॅ. धवन अदालत पहुंचे, तो आरोप है कि एंट्री गेट पर ही क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में ले लिया।

अगले दिन उन्हें अदालत में पेश कर सात दिन का रिमांड लिया गया। डाॅ. धवन लगभग दो महीने जेल में रहे। जमानत पर रिहा होने के बाद उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट ने जांच के लिए विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश को चंडीगढ़ प्रशासन ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने जांच पंजाब पुलिस के बजाय सीबीआई को सौंप दी।
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