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ट्रंप ने 10% से बढ़ाकर 15% किया ग्लोबल टैरिफ, भारत को राहत या नया झटका? समझें ट्रेड डील का पूरा गणित

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ट्रंप का नया 15% टैरिफ: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या होगा असर



नई दिल्ली| अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बौखलाए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर लगाए गए टैरिफ को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी (US temporary 15% tariff) कर दिया है। इसका सीधा असर भारत-अमेरिका व्यापार (India US trade deal) पर पड़ने वाला है। लेकिन कैसे? तो चलिए इस खबर में समझते हैं भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पूरा गणित।
अभी भारत पर कितना टैरिफ?

मामला थोड़ा पेचीदा है।

[*]2 अप्रैल 2025: अमेरिका ने भारत पर 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया।
[*]जुलाई में इसे घटाकर 25% किया गया।
[*]अगस्त में रूस से तेल खरीद जारी रखने पर 25% अतिरिक्त पेनल्टी लगाई गई।
[*]कुल असर: 50% तक टैरिफ।


फिर इस महीने अंतरिम ट्रेड डील के फ्रेमवर्क पर सहमति बनी। अमेरिका ने 25% रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18% करने और 25% पेनल्टी हटाने की घोषणा की। लेकिन यह अभी लागू नहीं हुआ था।

अब नया ट्विस्ट आया है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के व्यापक ग्लोबल टैरिफ को खारिज कर दिया। इसके बाद व्हाइट हाउस ने 20 फरवरी को नया आदेश जारी कर सभी आयात पर \“अस्थायी 15% सरचार्ज\“ लगा दिया।

यानी भारतीय सामान पर अब 25% की जगह 15% अस्थायी टैरिफ लगेगा (MFN ड्यूटी के अतिरिक्त)। फिलहाल यह दर कुछ महीनों के लिए लागू रहेगी।

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ट्रेड डील पर क्या असर पड़ेगा?

डोनल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि,


डील में कुछ नहीं बदलेगा।“


वहीं भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, अंतरिम समझौता अगले महीने साइन हो सकता है और अप्रैल से लागू हो सकता है। 23-26 फरवरी के बीच भारतीय टीम वॉशिंगटन में कानूनी मसौदा अंतिम रूप दे रही है।

डील में एक अहम क्लॉज है कि अगर कोई देश टैरिफ बदले, तो दूसरा देश भी अपनी शर्तें संशोधित कर सकता है। यानी भारत चाहे तो कुछ रियायतें वापस ले सकता है।
भारत के किन सेक्टरों पर असर?

ट्रंप के इस फैसले भारत को राहत मिल सकती है। क्योंकि, पहले 18% ड्यूटी की उम्मीद थी, अब 15% अस्थायी दर से निर्यातकों को थोड़ी राहत मिलेगी।

जारी रहेंगे भारी शुल्क:

[*]स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर पर 50%
[*]ऑटो कंपोनेंट्स पर 25%
[*]किन सामानों को छूट?


अमेरिका ने कुछ उत्पादों को 15% सरचार्ज से बाहर रखा है:

[*]जरूरी खनिज और धातुएं
[*]ऊर्जा उत्पाद
[*]कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा)
[*]फार्मा और फार्मा इंग्रीडिएंट
[*]कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन
[*]एयरोस्पेस उत्पाद

अब आगे क्या हो सकता है?

अमेरिका 1930 के टैरिफ एक्ट की सेक्शन 338 या 1974 के ट्रेड एक्ट की सेक्शन 301 का इस्तेमाल कर सकता है। भारत को बौद्धिक संपदा (IP) नियमों पर लगातार \“प्रायोरिटी वॉच लिस्ट\“ में रखा गया है। अमेरिका का आरोप है कि भारत ICT, सोलर, मेडिकल डिवाइस और फार्मा पर ऊंची कस्टम ड्यूटी रखता है।
निर्यातकों की क्या-क्या चिंता?

अब सबसे बड़ा सवाल रिफंड का है। अमेरिकी आयातकों ने पहले 25% ड्यूटी देकर माल खरीदा था, जो अब 15% है। अतिरिक्त 10% का क्या होगा? इस पर स्पष्टता का इंतजार है।

फिलहाल 15% टैरिफ से भारत को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन डील का भविष्य और अमेरिकी रणनीति आगे बड़ा असर तय करेगी।
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