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मेट्रो की रफ्तार पकड़ने जा रहा मेरठ... बह रही बदलाव की बयार, जुड़ने जा रहा नया अध्याय

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(प्रतीकात्मक फोटो)



मेरठ। रविवार का दिन मेरठ के इतिहास में एक नई पहचान जोड़ने जा रहा है। खेल उत्पाद और खिलाड़ियों का यह शहर अब मेट्रो की रफ्तार पकड़ेगा। शुक्रवार को ट्रायल रन के तौर पर बेगमपुल से दोपहर 1:18 बजे मेरठ मेट्रो चली और नौ मिनट में मेरठ साउथ पर पहुंच गई। यानी मेट्रो ने औसतन 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से शहर को ऊपर से नापा।

बेगमपुल से मेरठ दक्षिण स्टेशन तक का सफर सिर्फ 15 किमी का नहीं था, बल्कि जनपद के सार्वजनिक परिवहन के इतिहास में एक नया अध्याय था। जैसे ही ट्रेन भूमिगत कारिडोर को पार कर एलिवेटेड ट्रैक पर पहुंची सफर करने वालों की आंखों में उत्साह भर गया। हर कोई कह रहा था \“ऊपर से पूरा मेरठ दिख रहा है\“ तो किसी के लिए यह सिर्फ सफर नहीं, बल्कि शहर के बदलते चेहरे की झलक थी।

मेट्रो से मेरठ का कद इतना ऊंचा हो गया है कि इसमें बैठे-बैठे बढ़ता शहर साफ दिख रहा था। इससे पहले शहर का नजारा कभी इतना खूबसूरत नहीं दिखा था। समय के साथ कदम बढ़ाते इस शहर की सुंदर तस्वीर देख तमाम लोगों के मुंह से अनायास ही निकल पड़ा। वाह! कितना सुंदर है। इससे पहले माधवपुरम, टीपीनगर जैसे मुहल्लों को हमने इस नजरिये नहीं देखा। संजय वन हिमालय की तलहटी-सा खूबसूरत दिखा तो दिल्ली रोड और एक्सप्रेसवे के ऊपर जब मेट्रो पहुंची तो वहां तस्वीर किसी घाटी जैसी दिखी।

एक ऐसा सपना साकर होने जा रहा है, जिसका इंतजार पिछले सात साल से किया जा रहा था। इसके पीछे सात साल तक चला निर्माण है, परियोजना पूर्ण करने की लागत 30,274 करोड़ रुपये है। इसलिए रविवार का दिन सिर्फ उद्घाटन का नहीं, आत्ममंथन का भी है। मेट्रो का मतलब सिर्फ ट्रेन नहीं है, मेट्रो शहर का आईना है। मेट्रो में महिलाओं-दिव्यांगों के लिए सीटें रिजर्व हैं, व्हीलचेयर स्पेस भी रखा गया है। करीब सात साल के इंतजार के बाद मेरठ रविवार को अपनी मेट्रो देखने जा रहा है।

तीन मिनट में पूरा हुआ भूमिगत सफर
नमो भारत ट्रेन मेरठ में प्रवेश करने के बाद जैसे ही भूमिगत हिस्से में पहुंची शरीर में एक अजीब सिहरन शुरू हो गई थी। कानों में दबाव साफ महसूस हो रहा था, इसी बीच मोबाइल फोन के नेटवर्क भी गायब हो गए। लाइव कर रहे मीडियाकर्मी तीन मिनट के लिए जैसे थम से गए हों। अमूमन सुरंगों में आवाज महसूस होती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ। अगले तीन मिनट में ही नमो भारत बेगमपुल स्टेशन पर थी।

भारत माता की जय-नमो भारत की जय
हर चेहरे पर चमक, आवाज में जोश और बातों में उत्साह...मन में खुशी और नमो भारत जिंदाबाद का शोर...। कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखी जब सराय काले खां से नमो भारत मेरठ के लिए चली। मीडियाकर्मियों से भरी सपनों की ट्रेन ने चलने के कुछ देर बाद ही रफ्तार पकड़ी तो भारत माता की जय-नमो भारत की जय के जयकारे गूंज उठे।
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