फ्लाइट रद होने पर बीमा कंपनी पर 50 हजार हर्जाना, एअरलाइन को भी यात्रा पर अतिरिक्त खर्च राशि लौटानी होगी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/22/article/image/consumer9-1771771246977_m.webpजिला उपभोक्ता आयोग ने फ्लाइट रद पर एअरलाइन और बीमा कंपनी को सेवा में लापरवाही का दोषी ठहराया(
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता आयोग ने फ्लाइट रद पर एअरलाइन और बीमा कंपनी को सेवा में लापरवाही का दोषी ठहराया है। बीमा कंपनी आइसीआइसीआइ लोंबार्ड जनरल इंश्याेरेंस को हर्जाने के तौर पर 50 हजार रुपये अदा करने होंगे जबकि एअरलाइन एयर इंडिया को यात्रा पर खर्च हुई अतिरिक्त राशि को लौटाना होगा।
आयोग ने सेक्टर-49 निवासी संजीव जैन और उनकी पत्नी रिंकी जैन की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया है। एअरलाइन और बीमा कंपनी को नौ हजार रुपये मुकदमा खर्च भी अदा करना होगा।
शिकायत के अनुसार, दंपती ने 25 अगस्त 2019 को सूरत से दिल्ली की फ्लाइट बुक की थी। 24 अगस्त को उन्हें ईमेल और एसएमएस के माध्यम से सूचना मिली कि उनकी उड़ान रद कर दी गई है। दंपती का आरोप था कि प्रस्थान से 24 घंटे के भीतर फ्लाइट री-शेड्यूलिंग का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे उन्हें उसी दिन दूसरी फ्लाइट बुक करनी पड़ी।
इसके लिए प्रति टिकट 5,400 रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। इसके अलावा एअरलाइन की लापरवाही के कारण उन्हें दिल्ली से फगवाड़ा की ट्रेन भी कैंसल करनी पड़ी, जिसके लिए उन्होंने 1730 रुपये में बुकिंग करवाई थी।
इस कारण उन्हें अतिरिक्त नुकसान झेलना पड़ा। जिस कारण उन्होंने एअरलाइन और बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी। उन्होंने फ्लाइट के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस भी ली थी, इसलिए उन्होंने बीमा कंपनी को भी पार्टी बनाया। उनका कहना था कि बार-बार ईमेल भेजने के बावजूद उन्हें न तो उचित रिफंड मिला और न ही बीमा कंपनी ने क्लेम दिया।
कंपनियों ने रखा अपना पक्ष
एअरलाइन ने अपने जवाब में कहा कि फ्लाइट सुरक्षा और तकनीकी कारणों से रद्द की गई थी तथा टिकट राशि का रिफंड अप्रैल 2021 में प्रोसेस कर दिया गया था। वहीं, बीमा कंपनियों कहा कि उन्हें आवश्यक दस्तावेज ही नहीं दिए गए थे, जिस कारण उन्हें क्लेम नहीं दिया गया। ऐसे में दोनों ने इस शिकायत को खारिज करने की मांग की।
आयोग की टिप्पणी
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि एयरलाइन को वैध कारणों से उड़ान रद्द करने का अधिकार है, लेकिन ऐसी स्थिति में यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो एयरलाइन को रिफंड देना चाहिए था। यह एअरलाइन की जिम्मेदारी थी।
इस मामले में न तो वैकल्पिक उड़ान उपलब्ध कराई गई और न ही समय पर समाधान दिया गया, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनियां तकनीकी आधार पर दावों को खारिज नहीं कर सकतीं। ऐसे में आयोग ने दंपती के हक में फैसला सुनाया।
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