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मत्स्य पालक परेशान न हों, तालाब में विषाक्त पदार्थ से मछलियों के मरने पर आपको मिलेगा बीमा लाभ

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सरकार ने मत्स्य पालकों की सुविधा के लिए बीमा योजना का लाभ की योजना शुरू की है।



जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालकों के लिए एक ऐसी सुविधा दी है, जिससे मछलियों के मरने पर उन्हें बीमा का लाभ मिल सकेगा। किसी तालाब में विष डालकर मछलियों को मार दिया जाता है तो ऐसी स्थिति में भी क्षति की भरपाई संभव है। सरकार ने मत्स्य पालकों के लाभ के लिए जलीय कृषि बीमा शुरू की है। योजना का लाभ इसी वित्तीय वर्ष से मिलेगा।
प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से राहत

प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से अब मत्स्य पालकों को राहत मिलेगी। मत्स्य विभाग ने मछुआरों, मत्स्य पालकों तथा मत्स्यजीवी सहकारी समिति लिमिटेड के सदस्यों के लिए जलीय कृषि बीमा योजना प्रारंभ किया है। इस योजना के तहत तालाबों में विषाक्त पदार्थ डालकर मछलियों को मार देने जैसी घटनाओं में भी क्षति की भरपाई की व्यवस्था की गई है।
मत्स्य पालकों को जोखिम उठाना पड़ता है

मत्स्य पालन व्यवसाय में पालकों को अनेक प्रकार के जोखिम का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक प्रभाव मौसम परिवर्तन का पड़ता है। अत्यधिक वर्षा, भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड से उत्पादन प्रभावित होता है। गर्मी में जल में आक्सीजन की कमी हो जाती है। वर्षा में विभिन्न प्रकार के संक्रमण फैलते हैं। ठंड में मछलियों की सक्रियता घटने से उत्पादन कम हो जाता है।
आर्थिक क्षति होती है

इसके अतिरिक्त बाढ़, सूखा, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से तालाब क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और मछलियों के बह जाने से पालकों को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन्हीं समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से आरंभ की गई इस बीमा योजना में प्रीमियम राशि पर 40 से 50 प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि लौटाने का प्रविधान है। इसका लाभ जलीय कृषि से जुड़े किसान, मत्स्य पालक तथा इस व्यवसाय से संबद्ध अन्य लोग प्राप्त कर सकते हैं।
मत्स्य पालक ऐसे लें सकेंगे बीमा लाभ

योजना के मुताबिक यदि 80 प्रतिशत तक नुकसान होता है तो उसे पूर्ण हानि मानते हुए भुगतान किया जाएगा। किसी तालाब में विष डाल कर मछलियों को मारा जाएगा तो भी क्षति की भरपाई संभव है। इसके लिए घटना के 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज कराकर विभाग को सूचना दे दी जाए, जिससे समय रहते जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
क्या बोलीं सीडीओ?

प्रयागराज की सीडीओ हर्षिका सिंह का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से बचाव को सरकार की ओर से जलीय कृषि बीमा योजना शुरू की गई है, जिससे विषाक्त पदार्थ डालकर मछलियों को मार देने पर भी भरपाई हो सकेगी। बाढ़, सूखा, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की क्षतिपूर्ति भी हो सकेगी।
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